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आबकारी नीति मामले से हटीं जज स्वर्ण कांता शर्मा, केजरीवाल के खिलाफ अवमानना केस

दिल्ली हाई कोर्ट की जज स्वर्ण कांता शर्मा ने आबकारी नीति मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। यह मामला दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया समेत अन्य आम आदमी पार्टी से जुड़ा है। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने इस मामले में सोशल मीडिया पर अपने खिलाफ अपमानजनक और मानहानिकारक बयान पर अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के बाद यह कदम उठाया है।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने कहा, ‘ऐसा हो सकता है कि अगर मैं इस मामले की सुनवाई करती हूं तो अरविंद केजरीवाल और अन्य लोग यह सोच सकते हैं कि मुझे उनसे कोई दुश्मनी है। इस वजह से मैंने सोचा है कि इस विशेष मामले की सुनवाई कोई और पीठ करे।’

दिल्ली सरकार ने 2021 में आबकारी नीति पेश की थी। भ्रष्टाचार के आरोप लगने पर उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने सीबीआई जांच का आदेश दिया। 2022 में दिल्ली सरकार ने नीति को वापस ले लिया। ईडी ने नौ बार अरविंद केजरीवाल को समन भेजा। 21 मार्च 2024 को ईडी ने केजरीवाल को उनके घर से गिरफ्तार किया। 26 जून 2024 को सीबीआई ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। 13 सितंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद केजरीवाल तिहाड़ जेल से बाहर आए।

इसी साल फरवरी में दिल्ली की एक निचली अदालत ने आबकारी नीति मामले की सुनवाई की। इसमें अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को आरोप मुक्त करार दिया। बाद में सीबीआई ने निचले अदालत के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने मामले की सुनवाई शुरू की तो आम आदमी पार्टी के नेताओं ने न केवल आपत्ति दर्ज कराई, बल्कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को ही सवालों के कटघरे में खड़ा कर दिया गया।

आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा आरएसएस के कार्यक्रम में शामल हो चुकी हैं। उनके दोनों बच्चे केंद्र सरकार की खातिर काम करते हैं। यह हितों के टकराव का मामला। दिल्ली की पूर्व सीएम आतिशी ने भी एक्स पर एक पोस्ट किया और आबकारी नीति से जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को खुद को अलग न करने पर सवाल उठाया। आतिशी ने लिखा, ‘हाल के कई मामलों में खुद को अलग करने के बाद न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने इस मामले में खुद को अलग क्यों नहीं किया? इस मामले में क्या अलग है?’

सोशल मीडिया पर आम आदमी पार्टी कई आरोपों के बीच जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने खुद को मामले से अलग करने से इनकार कर दिया। इसके बाद अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया व दुर्गेश पाठक ने अदालत की कार्यवाही का बहिष्कार करने का फैसला किया। हालांकि गुरुवार को अचानक जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने खुद को आबकारी नीति से अलग कर लिया, लेकिन अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, विनय मिश्रा और सौरभ भारद्वाज के खिलाफ आपराधिक अवमानना ​​की कार्यवाही भी शुरू कर दी है।

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