नई दिल्ली। केंद्र सरकार के मत्स्य विभाग समुद्री खाद्य क्षेत्र के सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के लिए उत्पादन-से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना बनाने की संभावनाओं पर विचार करेगा।
इसी पहल के तहत 5-6 जून को विशाखापत्तनम में दोनों मंत्रालयों के द्वारा संयुक्त रूप से दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर’ का आयोजन किया जाएगा।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने गुरुवार को जारी एक बयान में बताया कि केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और मत्स्य पालन मंत्री राजीव रंजन सिंह ने समुद्री खाद्य क्षेत्र के विकास में तेजी लाने के लिए एक उच्च-स्तरीय बैठक की।
बैठक के दौरान दोनों मंत्रियों ने भारत के समुद्री खाद्य क्षेत्र की विकास गति को तेज करने और देश की वैश्विक निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत बनाने के लिए एक रूपरेखा तैयार करने पर चर्चा की।
मंत्रालय ने कहा कि इस बैठक का उद्देश्य भारत के समुद्री खाद्य क्षेत्र के विकास को गति देने और देश की वैश्विक निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने के लिए एक रूपरेखा (रोडमैप) पर विचार-विमर्श करना था।
मंत्रालय ने कहा, ‘‘मत्स्य विभाग, समुद्री खाद्य क्षेत्र के एमएसएमई के लिए एक विशेष पीएलआई योजना विकसित करने की संभावनाओं पर भी विचार करेगा।’’
वाणिज्य मंत्रालय ने बताया कि इस प्रस्ताव का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता को बेहतर बनाना, निर्यात-उन्मुख बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, प्रौद्योगिकी की स्वीकार्यता को बढ़ावा देना, शोध एवं विकास में सहायता करना और मूल्यवर्धन को बढ़ावा देना है।
मंत्रालय ने बताया कि प्रस्तावित रूपरेखा का उद्देश्य भारत के कुल समुद्री खाद्य (सीफूड) निर्यात में मूल्यवर्धित उत्पादों की हिस्सेदारी को बढ़ाना है, और साथ ही निर्यातकों की संख्या को मौजूदा के लगभग 1,200 से बढ़ाकर आने वाले वर्षों में 5,000 तक पहुंचाना है।
मंत्रालय के मुताबिक इस बैठक में वाणिज्य विभाग, मत्स्य पालन विभाग, एमपीएफआई, डीपीआईआईटी, एमपीईडीए और ईआईसी के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में निर्यात संवर्धन गतिविधियों को पीएमएमएसवाई और उससे जुड़ी अन्य योजनाओं के उद्देश्यों के साथ संरेखित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
उल्लेखनीय है कि घरेलू विनिर्माण और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सरकार पहले ही 14 क्षेत्रों के लिए पीएलआई योजना लागू कर चुकी है, जिसके लिए 1.97 लाख करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इन क्षेत्रों में रेफ्रिजरेटर, एसी जैसे ‘व्हाइट गुड्स’, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मास्युटिकल्स शामिल हैं।












