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मालवीय नगर की आग में इंसानियत का चेहरा बने अरमान, कई जिंदगियां बचाई

नई दिल्ली। दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर में हुई भीषण अग्निकांड की उस काली सुबह जब चारों ओर चीख-पुकार, धुआं और मौत का मंजर था, तब एक शख्स ने अपनी सूझबूझ और इंसानियत से कई लोगों के लिए उम्मीद की किरण जगा दी। यह शख्स थे अरमान, जिन्होंने अपने नुकसान की परवाह किए बिना अपनी दुकान के गद्दों और चादरों को लोगों की जान बचाने के लिए इस्तेमाल कर दिया।

अरमान ने बताया कि सुबह करीब 5:20 बजे उन्हें फोन आया कि उनकी दुकान के सामने स्थित होटल में भीषण आग लग गई है। फोन करने वाले ने उन्हें जल्द पहुंचकर अपना सामान बचाने की सलाह दी। लेकिन जब वह मौके पर पहुंचे तो सामने का दृश्य देखकर स्तब्ध रह गए। होटल की निचली मंजिल से आग की ऊंची-ऊंची लपटें निकल रही थीं, काला धुआं पूरे इलाके में फैल चुका था और लोग जान बचाने के लिए मदद की गुहार लगा रहे थे।

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ऐसे में अरमान ने अपनी दुकान के नुकसान की चिंता छोड़ दी। उन्होंने तुरंत दुकान से गद्दे निकालकर सड़क पर बिछाने शुरू कर दिए ताकि ऊपरी मंजिलों में फंसे लोग नीचे कूदकर अपनी जान बचा सकें। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इन गद्दों की मदद से कम से कम सात लोगों की जान बचाई जा सकी।

इतना ही नहीं, अरमान ने अपनी दुकान की सभी चादरें भी राहत कार्य में लगा दीं। घायल और बेहोश लोगों को उन्हीं चादरों के सहारे सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया और एंबुलेंस तक ले जाने में मदद की गई। जब हर तरफ अफरातफरी और भय का माहौल था, तब अरमान और उनके साथियों ने मानवता का परिचय देते हुए बचाव कार्य में अहम भूमिका निभाई।

मालवीय नगर अग्निकांड ने जहां कई परिवारों को गहरा जख्म दिया है, वहीं अरमान जैसे लोगों ने यह साबित कर दिया कि मुश्किल समय में इंसानियत सबसे बड़ी ताकत होती है। उनकी बहादुरी और संवेदनशीलता की चर्चा पूरे इलाके में हो रही है और लोग उन्हें इस त्रासदी का असली हीरो बता रहे हैं।”जब लोग अपनी जान बचाने की कोशिश कर रहे थे, तब अरमान दूसरों की जान बचाने में जुटे थे।” मालवीय नगर की इस त्रासदी में उनका यह साहस और सेवा भाव लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

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