HomeHealth & Fitnessरिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती की जाए : संघर्ष समिति

रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती की जाए : संघर्ष समिति

लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा है कि प्रदेश में लगातार बढ़ रही बिजली की मांग के अनुपात में बिजली कर्मचारियों की भारी कमी के कारण बिजली व्यवस्था पर गंभीर दबाव बढ़ता जा रहा है। भीषण गर्मी में लगातार नए मांग रिकॉर्ड बन रहे हैं, लेकिन वर्षों से नियमित भर्ती न होने, बड़ी संख्या में पद रिक्त रहने तथा संविदा कर्मियों की छंटनी के कारण फॉल्टों के निस्तारण,लाइन अनुरक्षण और उपभोक्ताओं को समय पर बिजली आपूर्ति बनाए रखना दिन-प्रतिदिन कठिन होता जा रहा है। संघर्ष समिति ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि प्रदेश की निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण बिजली व्यवस्था बनाए रखने के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता पर हटाए गए सभी संविदा कर्मियों को तत्काल सेवा में वापस लिया जाए, मार्च 2023 से अब तक आंदोलन के नाम पर की गई सभी उत्पीड़नात्मक एवं दंडात्मक कार्यवाहियां समाप्त की जाएं, तथा बिजली की बढ़ी हुई मांग और उपभोक्ताओं की संख्या के अनुरूप रिक्त पदों पर तत्काल नियमित भर्ती की जाए। संघर्ष समिति ने कहा कि आज प्रदेश में लगभग 3 करोड़ 73 लाख उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति दी जा रही है, जबकि वर्ष 2000 में लगभग 60 लाख उपभोक्ता थे। उस समय बिजली कर्मचारियों की संख्या लगभग 1 लाख 20 हजार थी, जबकि आज उपभोक्ताओं की संख्या छह गुना से अधिक हो जाने के बावजूद बिजली कर्मचारियों की संख्या घटकर 30 हजार से भी कम रह गई है। इसी प्रकार वर्ष 2000 में प्रदेश की अधिकतम बिजली मांग लगभग 6500-7000 मेगावाट होती थी, जबकि आज यह बढ़कर लगभग 33 हजार मेगावाट तक पहुंच गई है। हाल ही में प्रदेश में 32,673 मेगावाट की रिकॉर्ड मांग पूरी करते हुए एक ही दिन में 678.4 मिलियन यूनिट बिजली की आपूर्ति की गई, जो देश में सर्वाधिक रही। इतनी बड़ी व्यवस्था को सीमित कर्मचारियों के भरोसे संचालित करना अत्यंत कठिन हो गया है।  संघर्ष समिति ने कहा कि कर्मचारियों की कमी के कारण एक-एक कर्मचारी को कई कर्मचारियों का कार्य करना पड़ रहा है। फॉल्टों को ठीक करने में पहले की तुलना में अधिक समय लग रहा है, जिससे उपभोक्ताओं को भी अनावश्यक परेशानी उठानी पड़ रही है। आए दिन बिजली कर्मियों को जनता के आक्रोश का भी सामना करना पड़ता है, जबकि वास्तविक समस्या कर्मचारियों की भारी कमी है।

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