बहराइच के रानीपुर थाना क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक ढेलहा कर्बला में 10वीं मोहर्रम पर हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) और करबला के 72 शहीदों की याद में विशाल ताजिया जुलूस निकाला गया। इस अवसर पर हजारों अकीदतमंदों का जनसैलाब उमड़ पड़ा, जहां आस्था, श्रद्धा और भाईचारे का अद्भुत संगम देखने को मिला। “या हुसैन” की सदाओं से पूरा वातावरण मातमी रंग में डूब गया और कई आंखें नम दिखाई दीं।गोबरहा, ताजपुर, शादियाबाद, घानापुर, पण्डित पुरवा, चंदिया और सर्जना सहित दर्जनों गांवों से लोग सुबह से ही ढेलहा कर्बला पहुंचने लगे थे। ताजियों की भव्यता, अलमों की रौनक और ढोल-ताशों की गूंज ने पूरे क्षेत्र में एक आध्यात्मिक माहौल बना दिया। इस दौरान इमाम हुसैन (अ.स.) की कुर्बानी, सब्र, इंसाफ और इंसानियत के संदेशों पर चर्चा होती रही।कार्यक्रम का एक मुख्य आकर्षण ताजपुर और गोबरहा गांवों के पारंपरिक ढोलों का मिलन रहा। सदियों पुरानी यह परंपरा लोगों के बीच उत्साह का केंद्र बनी। ढोलों की गूंज और जोशपूर्ण माहौल के बीच हजारों लोगों ने इस ऐतिहासिक पल को अपने मोबाइल कैमरों में कैद किया। पूरा क्षेत्र तालियों और नारों से गूंज उठा।यह मोहर्रम आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक एकता, आपसी प्रेम और गंगा-जमुनी तहज़ीब का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया। विभिन्न समुदायों के लोगों ने इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और एक-दूसरे के प्रति सम्मान व सहयोग की मिसाल पेश की। इस दौरान देश में अमन, शांति और खुशहाली के लिए दुआएं मांगी गईं।सुरक्षा व्यवस्था को लेकर रानीपुर थाना पुलिस पूरी तरह मुस्तैद रही। प्रभारी निरीक्षक हरेन्द्र कुमार मिश्र के नेतृत्व में पुलिस बल ने जुलूस मार्ग से लेकर कर्बला परिसर तक लगातार निगरानी की। प्रशासन की सतर्कता और स्थानीय लोगों के सहयोग से पूरा आयोजन शांतिपूर्ण और गरिमामय ढंग से संपन्न हुआ।
मोहर्रम जुलूस में हिंदू-मुस्लिम एकता:ढेलहा कर्बला में दिखा गंगा-जमुनी तहजीब का अद्भुत संगम
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