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सिद्धार्थनगर में मनरेगा में फर्जी हाजिरी के आरोप पर एक्शन:कागजों में 148 मजदूर, जमीन पर गिने-चुने लोग; महिला मेट बर्खास्त


मनरेगा जैसी रोजगार योजना में पारदर्शिता पर सवाल खड़े करने वाला मामला सिद्धार्थनगर से सामने आया है। यहां शिकायत के बाद हुई जांच में कथित फर्जी हाजिरी और अनियमितताओं के आरोपों पर प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। शुरुआती जांच के बाद एक महिला मेट को बर्खास्त कर दिया गया है, जबकि ग्राम प्रधान, ग्राम विकास अधिकारी और रोजगार सेवक से जवाब तलब किया गया है। पीजी पोर्टल शिकायत से खुला मामला मामला सिद्धार्थनगर जिले के खेसरहा विकास खंड की ग्राम पंचायत बनकटा प्रथम का है। यह प्रकरण तब सामने आया जब आजाद अधिकार सेना के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष पूर्वांचल जितेंद्र कुमार पाण्डेय ने पीजी पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई। शिकायत की प्रतियां ग्रामीण विकास विभाग, मनरेगा आयुक्त, जिलाधिकारी और डीसी मनरेगा को भी भेजी गई थीं। मनरेगा कार्य में अनियमितता के लगाए गए आरोप शिकायत में आरोप लगाया गया कि मनरेगा योजना के तहत एक कार्यस्थल पर जारी मस्टर रोल संख्या 1143 से 1157 तक उपस्थिति और वास्तविक श्रमिकों की संख्या में गंभीर अंतर पाया गया। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। आरोप: मौके पर कम मजदूर, रिकॉर्ड में 148 की हाजिरी शिकायत के अनुसार 1 से 4 जून 2026 के बीच कार्यस्थल पर सीमित संख्या में मजदूर मौजूद थे, जबकि एनएमएमएस ऐप पर 148 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज किए जाने और उनकी तस्वीरें अपलोड किए जाने का आरोप लगाया गया। शिकायत में यह भी दावा किया गया कि बाद के दिनों में कार्यस्थल पर मजदूर नहीं होने के बावजूद उपस्थिति दर्ज होती रही। इन आरोपों की प्रशासनिक जांच की गई। फोटो और डिवाइस जांच की भी उठी मांग शिकायतकर्ता ने मांग की थी कि अपलोड की गई तस्वीरों का वास्तविक स्थिति से मिलान कराया जाए। साथ ही फोटो अपलोड करने में इस्तेमाल मोबाइल या डिवाइस की तकनीकी जांच कराई जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उपस्थिति कैसे दर्ज की गई। प्रशासन ने दिखाई सख्ती, महिला मेट हटाई गई मामले की गंभीरता को देखते हुए खंड विकास अधिकारी ने संज्ञान लिया। प्रारंभिक जांच के बाद संबंधित महिला मेट को पद से हटाने की कार्रवाई की गई। इसके साथ ही ग्राम प्रधान, ग्राम विकास अधिकारी और रोजगार सेवक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। आगे की जांच पर टिकी नजर प्रशासनिक कार्रवाई के बाद अब निगाहें आगे की जांच पर हैं। यदि जांच में अन्य स्तर पर भी जिम्मेदारी तय होती है तो संबंधित नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है। स्थानीय स्तर पर इस कार्रवाई को मनरेगा कार्यों में पारदर्शिता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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