इटवा क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम के ताजिए विभिन्न कर्बला स्थलों पर पारंपरिक श्रद्धा और विश्वास के साथ दफन किए गए। इस दौरान हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोगों ने भागीदारी की। क्षेत्र के मधवापुर सिकरी नाले, सेमरी, मस्जिदिया, जुडीकोईया, पोखर बिकवा और बिस्कोहर सहित कई कर्बला स्थलों पर श्रद्धालुओं ने आस्था के साथ मातम किया और निर्धारित स्थानों पर ताजियों को दफनाया। कई स्थानों पर मेले भी आयोजित हुए, जिनमें बच्चों और बुजुर्गों ने हिस्सा लिया। इस दौरान पारंपरिक लाठी भांजी का प्रदर्शन भी किया गया। नगर पंचायत बिस्कोहर में हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत की याद में दसवीं मुहर्रम पर शुक्रवार दोपहर चार बजे ताजियों का जुलूस निकला। अकीदतमंदों का हुजूम देर रात तक नगर के प्रत्येक वार्ड से ताजियों को लेकर कर्बला पहुंचा, जहां उन्हें शांतिपूर्ण माहौल में दफन करने की रस्म पूरी की गई। जुलूस के दौरान “या अली या हुसैन” के नारे गूंजते रहे। मझौवा, सिकौथा, बस्ती बरगदवा, नावडीह, बुड्ढी, खरीकवा और बड़हरा जैसे आसपास के गांवों के ताजिए भी स्थानीय कर्बला स्थलों पर दफन किए गए। बिस्कोहर नगर के पश्चिम टोला में मोहर्रम की नौवीं को रखे गए ताजिये का जुलूस शुक्रवार को दसवीं के दिन दोपहर चार बजे के बाद निकाला गया। इस जुलूस में पश्चिम टोले के ताजियादार पन्ना, पप्पू, मंजू, आसिफ, राजा, पप्पी, फरीदा, भोला, अनवर, नगीना, रमजानी और माहिल सहित कई लोग शामिल थे। सुरक्षा व्यवस्था के लिए त्रिलोकपुर एसओ हरे कृष्णा उपाध्याय और चौकी इंचार्ज अमित कुमार शाही अपनी पुलिस टीम के साथ जुलूस मार्ग और कर्बला पर लगे मेले में मुस्तैद रहे। इस दौरान अजीज, राम किशुन, सलीम, घनश्याम, राम कृपाल, मुजीबुर्रहमान और शमसाद सहित अन्य श्रद्धालु भी मौजूद रहे।
इटवा में मोहर्रम के ताजिए दफन:विभिन्न कर्बला पर पारंपरिक तरीके से दफन, पुलिस मुस्तैद
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