रौतार में गजब का खेल नाम कही और का काम कही और।

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रिपोर्ट: रामबचन गुप्त
निचलौल/महराजगंज।मनरेगा के तहत सरकारी आंकड़े में विकास की गंगा जरूर बहायी जा रही हैं परंतु धरातल पर हकीकत इससे कोषों दूर हैं एक तरफ सरकार की तरफ से विकास की बड़े-बड़े दावे किये जा रहे हैं तो वही दूसरी तरफ बैठे भ्रष्ट अधिकारी अपना जेब भरने के लिए तरह-तरह का तरीका अपना रहे हैं।मामला विकास खंड निचलौल के रौतार का हैं जहां क्षेत्र पंचायत निधि से एक पुलिया का निर्माण कराया जा रहा हैं।मस्टरोल पर कार्य का नाम रौतार और कटका के मध्य रौतार माईनर पर पुलिया निर्माण कार्य दर्शाया गया हैं।मीडिया टीम के रियलिटी चेक में ऐसे लोकेशन पर पुलिया का कोई काम नही हो रहा हैं।मीडिया टीम बरगदही चौराहे पर ग्रामीणों से बात किया तो उनके द्वारा बताया गया कि मस्टरोल में जिस लोकेशन को दर्शाया गया हैं वह इस चौराहे से उत्तर दिशा में हैं।लेकिन इधर कोई पुलिया निर्माण नही हो रहा हैं।काफी प्रयास के बाद पता चला कि बरगदही चौराहे से दक्षिण रौतार-कोहड़वल मार्ग से निकली हुई एक चकरोड पर पुलिया निर्माण हो रहा हैं।मौके पर पहुँची मीडिया टीम को हैरान कर देने वाला तस्वीर सामने आया।जिस पुलिया के निर्माण के लिए क्षेत्र पंचायत निधि से लगभग 6लाख इकहत्तर हजार तीन सौ का बजट दिखाया गया हैं वह मात्र एक होम पाईप से पानी निकासी हो सकता हैं ऐसे में हजारों के काम को लाखों में पानी की तरह पैसा क्यो बहाया जा रहा हैं

सब गोलमाल हैं भाई सब गोलमाल हैं।
सरकारी कागज में यह जगह रौतार और कटका के मध्य रौतार माईनर पर पुलिया निर्माण कार्य दर्शाया गया हैं परंतु हकीकत में न तो यह रौतार और कटका के मध्य में हैं और न ही किसी माईनर पर काम हो रहा हैं।मौके पर यह रौतार से कोहड़वल जाने वाली PWD सड़क से निकलकर जाने वाली एक चकरोड हैं जहाँ कोई भी माईनर नही हैं चकरोड के दोनों तरफ लहराती हुई धान की फसल हैं उसी बीच इस पुलिया के भारी भड़कम धनराशि से काम कराया जा रहा हैं।

पुलिया निर्माण के नाम पर सरकारी धन का हो रहा हैं बंदरबाट।
जिस पानी निकासी के लिए लगभग 6लाख इकहत्तर हजार तीन सौ रुपये का खर्च किया जा रहा हैं अगर अधिनस्त कर्मचारी मौके पर जाकर जांच किया होता तो पानी निकासी का समाधान मात्र हजारो में सिमट कर रह गया होता।फिर इतनी बड़ी सरकारी धन की घपलेबाजी कैसे हो सकता।

*आइये जानते हैं तकनीकी अधिकारी आत्माराम दुबे ने क्या कहा।*
क्षेत्र पंचायत निधि से होने वाले कार्यो का स्टीमेट बनाने वाले तकनीकी अधिकारी आत्माराम दुबे से जब हमारे संवाददाता द्वारा पूछा गया कि पुलिया का निर्माण कहा हो रहा हैं तो उनके द्वारा बताया गया कि माईनर पर हो रहा हैं।आगे जब हकीकत से रूबरू कराया गया तो जबाब में आत्माराम दुबे ने कहा कि ग्राम सभा की कार्ययोजना में यही लिखा गया हैं।जबकि तकनीकी सहायक का काम होता हैं कि मौके पर पहुचकर स्थिति को देखते हुए स्टीमेट बनाये।इस तरह की जबाबदेही से पाठक समझ सकते हैं कि सरकारी तंत्र में कैसा काम हो रहा हैं।केवल कागजो को देखकर तकनीकी सहायक आत्माराम दुबे ने एक होम पाइप के जगह 6लाख इकहत्तर हजार तीन सौ का स्टीमेट बना दिया।सही भी हैं जब स्टीमेट अधिक का होगा तभी तो कमीशन अधिक बनेगा।जब हाथ ही मारना हैं तो बड़ा हाथ मारे छोटा हाथ मारने में क्या फायदा।
*अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी शिवेंद्र प्रताप सूर्यवंशी ने कही बड़ी बात।*
नवागत अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी शिवेंद्र प्रताप सूर्यवंशी ने कहा कि मामला हमारे संज्ञान में आया हैं जांच कर कार्यवाही की जाएगी।