मिडिल ईस्ट में फिलहाल जंग खत्म होने के आसार नहीं दिखाई दे रहे हैं। मंगलवार को ईरान ने पाकिस्तान में शांति के लिए चल रही बातचीत में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है। ईरान ने यह कदम अमेरिका के द्वारा दी जा रही धमकियों के बीच उठाया है। इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत होनी है।
डोनाल्ड ट्रंप की आए दिन दी जा रही धमकी और होर्मुज स्ट्रेट की अमेरिकी नाकेबंदी से ईरान नाराज है। इसी बात को लेकर ईरान ने पाकिस्तान जाने से मना किया है। ईरान के इस कदम से खाड़ी देशों के साथ ही विश्व के दर्जनों देशों के लिए संकट गहरा गया है।
गालिबफ ने किया एलान
दरअसल, ट्रंप ने इस्लामाबाद में अमेरिकी डेलिगेशन भेजने की बात कही है, लेकिन ईरान को लेकर अभी संशय की स्थिति बनी हुई है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने ट्रंप को सख्त लहजे में जवाब देते हुए एक्स पर कहा, ‘अमेरिका इस्लामाबाद वार्ता को ‘समर्पण की मेज’ में बदलने की कोशिश कर रहा है। अगर तनाव और बढ़ता है, तो ईरान जंग के मैदान में नए पत्ते’ खोलने के लिए तैयार है।’
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उन्होंने आगे कहा कि ईरान ने पिछले दो हफ्ते लड़ाई के मैदान में नए पत्ते दिखाने की तैयारी में बिताए हैं, जो कुटनीतिक बातचीत के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ने पर ज़्यादा टकराव वाले रुख का संकेत है।
‘नए झगड़े को सही ठहराना चाहते हैं’
उन्होंने लिखा, ‘ट्रंप, रास्ता रोककर और सीजफायर तोड़कर इस बातचीत की टेबल को अपने हिसाब से सरेंडर की टेबल में बदलना चाहते हैं। वह नए झगड़े को सही ठहराना चाहते हैं। हम धमकी के साये में बातचीत स्वीकार नहीं करते हैं और पिछले दो हफ्तों में हमने लड़ाई के मैदान में नए पत्ते दिखाने की तैयारी की है।’
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ईरान का होर्मुज स्ट्रेट पर कब्जा बरकरार
बता दें कि सोमवार को अमेरिकी नेवी ने होर्मुज स्ट्रेट के पास ईरान के एक कार्गो जहाज को अपने कब्जे में ले लिया था। ईरानी न्यूज एजेंसी तस्नीम की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के अमेरिका के नियमों को न मानने के संकेत के बावजूद होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों के आने-जाने में तेजी से गिरावट आई है। इसमें कहा गया है कि पिछले 12 घंटों में सिर्फ तीन जहाज ही होर्मुज से गुजरे हैं।
मिलिशिया ग्रुप भी करेगा हमले
इसी बीच इराक समर्थित हथियारबंद ग्रुप ने चेतावनी दी है कि वह अमेरिकी ठिकानों पर हमले करेगा। उसने 22 अप्रैल को हमले करने की चेतावनी दी है। सरया अवलिया अल-दाम के कमांडर अबू महदी अल-जाफरी ने एक बयान में कहा कि उनके लड़ाके मिलिट्री ऑपरेशन फिर से शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने दावा किया कि ग्रुप ने इराक और बड़े इलाके में कब्जे वाली मौजूदगी के खिलाफ पहले ही 200 से अधिक हमले किए हैं।












