सिद्धार्थनगर के खेसरहा क्षेत्र में गेहूं की कटाई के बाद खेतों में पराली जलाने का सिलसिला जारी है। प्रशासन की सख्त मनाही के बावजूद किसान खुलेआम डंठल जला रहे हैं, जिससे आसपास के लोगों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। यह स्थिति बंजरहा बुजुर्ग, सकारपार, गैडाखोर, झुडिया बुजुर्ग, टिकूर और महुलानी सहित कई गांवों में देखी जा रही है, जहाँ खेतों में आग लगाकर पराली जलाई जा रही है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, पराली जलाने से निकलने वाले धुएं के कारण वातावरण प्रदूषित हो रहा है। इससे लोगों को सांस लेने में परेशानी और आंखों में जलन जैसी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो रही हैं। इसके अतिरिक्त, सड़क किनारे खेतों में आग लगाने से सड़क हादसों का खतरा भी बढ़ गया है। ग्राम बंजरहा बुजुर्ग निवासी रामनयन, सकारपार निवासी शिवपूजन, गैडाखोर निवासी रामविलास और महुलानी निवासी पवन ने बताया कि पराली जलाने के कारण गांव में रहना मुश्किल हो गया है। उन्होंने प्रशासन से इस पर सख्ती से रोक लगाने की मांग की है। प्रशासन द्वारा पराली न जलाने के लिए कई बार जागरूकता अभियान चलाए गए हैं और जुर्माने की चेतावनी भी दी गई है। हालांकि, इन प्रयासों का जमीनी स्तर पर कोई खास असर नहीं दिख रहा है। ग्रामीणों का मानना है कि यदि समय रहते इस समस्या पर सख्ती नहीं की गई, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। इस संबंध में उपजिलाधिकारी बांसी, निखिल चक्रवर्ती ने बताया कि पराली जलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और लगातार निगरानी रखी जा रही है। इसके बावजूद, क्षेत्र में नियमों की अनदेखी जारी है, जो प्रशासन के लिए एक चुनौती बनी हुई है।
खेसरहा क्षेत्र में गेहूं के डंठल जलाने का सिलसिला जारी:प्रशासन की सख्ती के बावजूद किसान कर रहे नियमों की अनदेखी
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