सिद्धार्थनगर में 22 अप्रैल बुधवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला स्वास्थ्य समिति (डीएचएस) की समीक्षा बैठक में जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर खामियां सामने आईं। जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन की अध्यक्षता और मुख्य विकास अधिकारी बलराम सिंह की उपस्थिति में हुई इस बैठक में स्वास्थ्य विभाग की सुस्त कार्यशैली पर कड़ा रुख अपनाया गया। समीक्षा के दौरान आयुष्मान भारत योजना की प्रगति बेहद खराब पाई गई। जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रजत कुमार चौरसिया को कड़ी फटकार लगाते हुए जल्द से जल्द लक्ष्य पूरा करने के निर्देश दिए। आयुष्मान सेंटरों के समय से न खुलने और क्षेत्रीय निगरानी की कमी पर भी नाराजगी व्यक्त की गई। स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत पर सवाल उठाते हुए जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ए.के. झा को सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में व्यवस्थाएं दुरुस्त की जाएं और मरीजों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो। वार रूम की नियमित मॉनिटरिंग और इमरजेंसी व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश भी दिए गए। बैठक में समस्त सीएचसी/पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों (एमओआईसी), बीपीएम, बीसीपीएम, एएनएम, आशा और सीएचओ की कार्यप्रणाली पर भी असंतोष व्यक्त किया गया। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि काम में लापरवाही करने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा और नोटिस जारी कर कार्रवाई की जाएगी।
घर पर हो रही डिलीवरी का मुद्दा सबसे गंभीर रहा। इस पर डीएम ने सभी एमओआईसी को कड़ी चेतावनी दी कि प्रसव हर हाल में अस्पताल में ही कराए जाएं, अन्यथा सीधे जिम्मेदारी तय होगी। आशा कार्यकर्ताओं की निष्क्रियता पर भी सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें चिन्हित कर कार्रवाई के निर्देश दिए गए। टीकाकरण, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर, परिवार नियोजन और टीबी नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विभाग की कमजोर स्थिति सामने आई। जिलाधिकारी ने सीएमओ और संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाते हुए इन क्षेत्रों में सुधार के निर्देश दिए।












