श्रावस्ती जिले के नासिरगंज कस्बे और आसपास के इलाकों में इन दिनों बंदरों का आतंक चरम पर है। बंदरों के झुंड न केवल रिहायशी इलाकों में लोगों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं, बल्कि अब उन्होंने आम के बागों को भी अपना निशाना बनाना शुरू कर दिया है। इससे स्थानीय बागवानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान में आम के पेड़ों पर फल आने का समय है। बंदरों की टोलियां पेड़ों पर चढ़कर कच्ची अमिया को तोड़कर बर्बाद कर रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बंदर फल खाने से ज्यादा उन्हें तोड़कर नीचे फेंक देते हैं, जिससे पूरी फसल नष्ट हो रही है। बागवानों ने बताया कि दिन-रात पहरा देने के बावजूद बंदरों को भगाना मुश्किल हो रहा है। उनकी संख्या इतनी अधिक है कि उन्हें नियंत्रित करना एक बड़ी चुनौती बन गया है। स्थानीय बागवानों पप्पू हुसैन, शीबू, आरिफ और बन्ने जैसे लोगों का कहना है कि उन्होंने इस साल अच्छी फसल की उम्मीद में काफी मेहनत और पैसा निवेश किया था। लेकिन बंदरों के बढ़ते हमलों ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। उनका अनुमान है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो इस साल आम की पैदावार आधे से भी कम रह जाएगी।
नासिरगंज में बंदरों का आतंक, आम की फसल को नुकसान:बागवानों को आर्थिक क्षति, पैदावार घटने की आशंका से चिंतित।
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