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बिजली कर्मियों का ऐलान: प्रदेश के व्यापक हित में निजीकरण के खिलाफ हर संघर्ष के लिए तैयार

लखनऊ। मई दिवस के अवसर पर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के आह्वान पर प्रदेश भर के बिजली कर्मियों, अभियंताओं एवं कर्मचारियों ने एकजुट होकर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के प्रस्तावित निजीकरण के विरुद्ध किसी भी प्रकार का बलिदान देने का दृढ़ संकल्प लिया।

संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि बिजली जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण और जनजीवन से जुड़े क्षेत्र का निजीकरण न केवल लाखों उपभोक्ताओं के हितों के खिलाफ है, बल्कि यह सामाजिक न्याय और सस्ती व विश्वसनीय बिजली उपलब्ध कराने की अवधारणा को भी कमजोर करेगा। निजीकरण के परिणामस्वरूप बिजली दरों में वृद्धि, सेवाओं की गुणवत्ता में गिरावट तथा कर्मचारियों के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना तय है।

मई दिवस, जो श्रमिक एकता, अधिकारों और संघर्ष का प्रतीक है, के अवसर पर बिजली कर्मियों ने यह संकल्प लिया कि वे प्रदेश के व्यापक जनहित में निजीकरण की इस नीति का हर स्तर पर विरोध करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर निर्णायक आंदोलन से भी पीछे नहीं हटेंगे।

संघर्ष समिति ने यह भी आरोप लगाया कि प्रबंधन द्वारा कर्मचारियों का लगातार उत्पीड़न किया जा रहा है, उनकी जायज़ मांगों की अनदेखी की जा रही है तथा संवाद की प्रक्रिया को कमजोर किया जा रहा है। इस स्थिति को तत्काल समाप्त करने की मांग करते हुए समिति ने चेतावनी दी कि यदि उत्पीड़न बंद नहीं हुआ और निजीकरण के फैसले को वापस नहीं लिया गया, तो बिजली कर्मी एक व्यापक और निर्णायक संघर्ष छेड़ने के लिए बाध्य होंगे।

संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार से अपील की कि वह जनहित, उपभोक्ता हित और कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए निजीकरण की प्रक्रिया को तुरंत रोकें तथा सभी पक्षों के साथ सार्थक संवाद स्थापित करें।अंत में, मई दिवस के अवसर पर सभी बिजली कर्मियों ने एकजुटता, संघर्ष और जनसेवा के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि वे प्रदेश की विद्युत व्यवस्था को मजबूत और जनहितकारी बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।

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