लखनऊ /जौनपुर। उत्तर-प्रदेश विधानसभा सत्र के दौरान मछलीशहर से समाजवादी पार्टी की विधायक डॉ. रागिनी सोनकर ने गुरुवार को महिला सुरक्षा और अधिकारों के मुद्दे पर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने भावुक और आक्रामक अंदाज में महिलाओं के साथ हो रहे अत्याचारों पर सवाल उठाते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए।
सदन में बोलते हुए डॉ. रागिनी सोनकर ने कहा, “मैं यूपी की नारी हूं, हर रोज सताई जाती हूं। राम राज्य का झांसा देकर बलि चढ़ाई जाती हूं। सिंदूर, कोख और इज्जत नोंच जिंदा लाश बनाई जाती हूं।” उनके इस बयान के बाद सदन का माहौल गंभीर हो गया।
उन्होंने प्रदेश में महिलाओं के साथ हो रही जघन्य घटनाओं का जिक्र करते हुए लखनऊ, गाजियाबाद, मेरठ, कानपुर, बुलंदशहर, हाथरस, सुल्तानपुर, मथुरा, लखीमपुर खीरी, उन्नाव, कौशांबी और बनारस जैसे जिलों में बलात्कार, हत्या और उत्पीड़न के मामलों को उठाया।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महिला सुरक्षा के मुद्दे पर विफल रही है। विधायक ने कहा कि यदि केंद्र और प्रदेश सरकार को महिलाओं की चिंता होती, तो सर्वसम्मति से पारित महिला आरक्षण बिल की अधिसूचना ढाई वर्ष तक लंबित नहीं रहती।
उन्होंने भाजपा सरकार पर महिलाओं के प्रति नकारात्मक सोच रखने का आरोप लगाते हुए कहा कि “महिला सशक्तिकरण की बात करने वाली सरकार ही उनके जिंदा जलने पर देखने तक नहीं जाती।”
भाजपा विधायक अनुपमा जायसवाल के जलने की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उनके हालचाल जानने सबसे पहले सपा प्रमुख अखिलेश यादव पहुंचे, जबकि सत्ता पक्ष के नेता बाद में पहुंचे।इस पर उन्होंने सरकार पर तंज भी कसा।
डॉ. सोनकर ने 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को लेकर सरकार को घेरते हुए कहा कि यदि 403 विधानसभा सीटों में 50 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाए तो पूरा विपक्ष सरकार के साथ खड़ा होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महिलाओं को नेतृत्व से दूर रखना चाहती है और चुनाव प्रक्रिया में भी बाधाएं डाल रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान सरकार विपक्षी विधायकों के विकास कार्यों के बजट में कटौती कर रही है, जबकि सत्ता पक्ष को अधिक धनराशि दी जा रही है। पंचायत सहायकों, रसोइयों, स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं और बेरोजगार युवतियों की समस्याओं को भी उन्होंने प्रमुखता से उठाया।
अपने भाषण के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार नियम-कानूनों की अनदेखी कर रही है और महिला आरक्षण पर केवल दिखावा कर रही है।
उन्होंने मांग की कि महिलाओं को समान अवसर देते हुए 33 प्रतिशत आरक्षण तुरंत लागू किया जाए, जिससे ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग की महिलाएं भी उच्च सदन में पहुंच सकें।
हालांकि, निर्धारित 8 मिनट का समय पूरा होने से पहले ही विधानसभा अध्यक्ष ने उन्हें टोक दिया, जिसके बाद उनका भाषण समाप्त हो गया।












