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ईरान से भिड़कर अमेरिका में कैसे बढ़ रहीं ट्रंप की मुश्किलें? इनसाइड स्टोरी

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, ईरान सकंट की वजह से धीरे-धीरे अपने देश में ही अलग-थलग पड़ते नजर आ रहे हैं। पहले कार्यकाल में जिस राजनीतिक स्थिरता की बात डोनाल्ड ट्रंप कर रहे थे, उससे कहीं दूर, वह आगे निकल आए हैं। उन्होंने दूसरे कार्यकाल का सबसे हिंसक फैसला लिया है, जिसका खामियाजा, अमेरिकी सेना भुगत रही है। खाड़ी के देशों में अमेरिकी सैन्य बेस को नुकसान हुआ है, अमेरिकी सैनिकों की शहादत हुई है। ईरान में बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया को तेल और गैस संकट के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।

अमेरिका में ट्रंप अभी भी देश की मुख्य आवाज बने रहेंगे या उनके द्वारा शुरू की गई जंगें, उन्हें असफल राष्ट्रपति बनाने की ओर ले जा रही हैं। अमेरिका में पहली बार, राजनीतिक अस्थिरता के हालात नजर आ रहे हैं। 2028 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में अब रिपब्लिकन के लिए राहें मुश्किल होने वाली हैं। 5 साल शासन, फिर डेमोक्रेट्स को वनवास से जूझना पड़ रहा है लेकिन अब वे, ट्रंप से बेहतर नजर आ रहे हैं।

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कैपिटल हिल पर पकड़ खो रहे ट्रंप?

डोनाल्ड ट्रंप की कैपिटल हिल पर रिपब्लिकन सांसदों की पकड़ अब परीक्षण के दौर से गुजर रही है। ईरान नीति पर उनके नेतृत्व से नाराजगी बढ़ रही है। पिछले साल एपस्टीन फाइल्स पर विद्रोह के बाद यह और साफ हो गया है। अब लोग, ट्रंप के अभियानों के खिलाफ मुखर हो रहे हैं। उनकी पार्टी के लिए यह ठीक राजनीतिक संकेत नहीं है।

अलोकप्रिय हो रहे हैं ट्रंप?

कठोर इमिग्रेशन नीतियों के कारण हवाई अड्डों पर लंबी लाइनें और डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी के मनमाने रवैये ने आम लोगों में असंतोष बढ़ा दिया है। सरकारी शटडाउन से दोनों सरकार और जनता दोनों को नुकसान होता है। राष्ट्रपति ट्रंप की वजह से अमेरिका में लंबे समय तक, शटडाउन की स्थिति रही है। उनके थोपे गए फैसले, अब अमेरिका पर भारी पड़ रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप को सफाई देनी पड़ रही है कि वह ईरान से तेल नहीं खरीदते हैं, उन्हें होर्मुज की जरूरत नहीं है। जिस होर्मुज पर पूरा कंट्रोल चाहते थे, उसी पर बयान बदल रहे हैं।

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राजनीतिक पारी में ट्रंप के बुरे दिन शुरू?

डोनाल्ड ट्रंप, अब 80 साल के होने वाले हैं। उन्होंने अपने दूसरे कार्यकाल की सबसे बड़ी चुनौती ईरान युद्ध शुरू करके ली है। बिना देश को साथ लिए वह जंग में कूद पड़े हैं। अमेरिका में लोग कह रहे हैं कि यह जंग, अमेरिका ने इजरायल के दबाव में शुरू की है। उनकी चौतरफा आलोचना हो रही है। दिलचस्प बात यह है कि जंग से बाहर निकलने के लिए भी ट्रंप के पास कोई प्लान नहीं है, न ही जंग जारी रखने का। उनके बार-बाद बदलते बयानों ने उनकी मानसिक स्थिति पर भी सवाल उठाए हैं।

कैसे घट रही है ट्रंप की लोकप्रियता?

अमेरिका में अब डोनाल्ड ट्रंप, अप्रूवल रेटिंग में लगातार हाशिए पर जा रहे हैं। CNN की एक रिपोर्ट के मुताबिक तीन हालिया ओपिनियन पोल में उनकी अप्रूवल रेटिंग 40 फीसदी से नीचे चली गई है। 60 फीसदी लोग उन्हें खारिज कर रहे हैं, या नराज हैं। सिर्फ 38 फीसदी लोग, उनके साथ हैं।

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जंग में क्या करना है, सोच नहीं पा रहे ट्रंप?

डोनाल्ड ट्रंप ने जंग तो छेड़ दी है लेकिन यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि करना क्या है। कभी शांति सौदे की बात करते हैं, कभी हमले रोकने की बात करते हैं, कभी कहते हैं कि उन्हें होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण ही नहीं चाहिए। रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने कैबिनेट मीटिंग में इसे ऐतिहासिक क्षण बताया है लेकिन अगर अमेरिका को जीत नहीं मिली तो ट्रंप की विरासत पर संकट आएगा।

रिपब्लिकन पार्टी पर पकड़ खो रहे हैं ट्रंप?

डोनाल्ड ट्रंप, रिपब्लिकन पार्टी के मजबूत नेता रहे हैं। ईरान युद्ध पर लगातार वादा खिलाफी के चलते, उनका विस्तारित गठबंधन भी संकट में है। स्वतंत्र वोटरों में ट्रंप के खिलाफ अस्वीकृति 68 फीसदी तक पहुंच गई है। कंजर्वेटिव पॉलिटिकल एक्शन कॉन्फ्रेंस (CPAC) 2026 टेक्सास के ग्रेपवाइन में हो रहा है। यहां आमतौर पर ट्रंप की जीत का उत्सव होता था, लेकिन इस बार ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ वाले नारों और कार्यक्रमों से लोग दूर जा रहे हैं।

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अमेरिका में क्या हो रहा है?

डोनाल्ड ट्रंप का इस जंग में व्यक्तिगत नुकसान नहीं होगा लेकिन उनकी पार्टी को यह नुकसान झेलना पड़ेगा।अमेरिका में मौजूदा रुझान 2028 चुनाव की नींव रख रहे हैं। अमेरिका में अगला चुनाव, महंगाई, आवास संकट और युद्ध पर होगा। ऑर्गेनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक कॉपरेशन एंड डेवपेलमेंट (OECD) ने गुरुवार को आशंका जाहिर की है कि अमेरिका में महंगाई, इस साल 4 फीसदी बढ़ेगी। ट्रंप का यह आखिरी कार्यकाल है लेकिन उनकी वजह से रिपब्लिकन पार्टी के खिलाफ माहौल बन रहा है।

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