नई दिल्ली। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ग्रेट निकोबार द्वीप विकास परियोजना को दी गई पर्यावरणीय मंजूरी पर गंभीर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार पर अधूरी और अपर्याप्त पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) रिपोर्टों के आधार पर स्वीकृति देने का आरोप लगाया है। उन्होंने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव को पत्र लिखकर कहा कि सरकार के दावे मंत्रालय के आधिकारिक दस्तावेजों और उपलब्ध अध्ययनों से मेल नहीं खाते।
जयराम रमेश ने कहा कि अंडमान-निकोबार जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इतनी बड़ी परियोजना के लिए कम से कम तीन मौसमों पर आधारित व्यापक अध्ययन जरूरी था, लेकिन अंतिम ईआईए रिपोर्ट केवल दिसंबर 2020 से फरवरी 2021 के बीच सीमित अवधि के आंकड़ों पर तैयार की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि जैव विविधता, तटीय कटाव और लेदरबैक कछुओं जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं का अध्ययन भी कुछ दिनों तक सीमित रहा।
रमेश ने आरोप लगाया कि पर्यावरण मंत्रालय ने उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की। उन्होंने कहा कि ग्रेट निकोबार की दुर्लभ जैव विविधता को परियोजना से गंभीर नुकसान पहुंच सकता है और प्राकृतिक वनों की भरपाई कृत्रिम वृक्षारोपण से संभव नहीं है। कांग्रेस नेता ने परियोजना और मंजूरी प्रक्रिया की पुनर्समीक्षा की मांग की है।
ग्रेट निकोबार परियोजना की मंजूरी पर कांग्रेस महासचिव ने उठाए पर्यावरणीय सवाल
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