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नीट परीक्षा रद्द होने पर कांग्रेस ने उठाए एनटीए के अस्तित्व पर सवाल


नई दिल्ली। कांग्रेस ने नीट‑यूजी 2026 परीक्षा रद्द होने पर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के अस्तित्व और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। पार्टी महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने कहा कि पेपर लीक और परीक्षा रद्द होना एनटीए की विफलता का ताजा उदाहरण है, जिसने इसके उद्देश्य और कार्यक्षमता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
जयराम रमेश ने एक्स पोस्ट में लिखा कि शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने अपनी 371वीं रिपोर्ट में उल्लेख किया था कि केवल 2024 में ही एनटीए द्वारा आयोजित 14 राष्ट्रीय परीक्षाओं में से 5 में पेपर लीक और अनियमितताओं के मामले सामने आए। जेईई मेन्स 2025 में उत्तर कुंजी में त्रुटियों के कारण 12 प्रश्न वापस लेने पड़े, जबकि सीयूईटी में लगातार देरी से विश्वविद्यालयों का शैक्षणिक कैलेंडर प्रभावित हुआ और छात्रों को निजी विश्वविद्यालयों की ओर धकेला गया।
कांग्रेस नेता ने कहा कि एनटीए लगातार संसद को अपनी वार्षिक रिपोर्ट देने में विफल रही है और केवल ऑडिटेड वित्तीय विवरण ही उपलब्ध कराती रही है। सरकार ने पुरानी प्रवेश प्रक्रियाओं को खत्म कर भ्रष्टाचार से ग्रस्त केंद्रीकृत व्यवस्था लागू की और यह सुनिश्चित किया कि वह संसद के प्रति जवाबदेह न रहे।
जयराम ने कहा कि 16 जून 2024 को शिक्षा मंत्री ने स्वीकार किया था कि एनटीए को बहुत सुधार की जरूरत है। दो साल बाद भी इस स्वीकारोक्ति के बाद क्या कार्रवाई हुई। अब यह स्पष्ट हो रहा है कि केवल सुधार नहीं बल्कि एनटीए और उससे जुड़े पूरे तंत्र का बुनियादी पुनर्गठन जरूरी है, ताकि इसे मोदी सरकार के भ्रष्ट हाथों से बाहर रखा जा सके।
 

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