- लखनऊ की रिजर्व पुलिस लाइन में तैनात सिपाही का मामला
लखनऊ। राजधानी की रिजर्व पुलिस लाइन के सिपाही सुनील शुक्ला ने यूपी पुलिस में फैले भ्र्ष्टाचार की काली खोल दी। लगातार कई वीडियो जारी होने के बाद सुनील शुक्ला चर्चा में आ गए। वहीं उनकी इस हिम्मत की उनके सहकर्मी जमकर तारीफ कर रहे हैं।
चर्चा है कि अराजपत्रित कर्मचारी सुनील शुक्ला का लगातार समर्थन कर रहे हैं। सिपाही सुनील शुक्ला ने वीडियो जारी कर आईपीएस अधिकारियों को काला अंग्रेज बता डाला था। वहीं अब सुनील शुक्ला को लेकर लोग यह भी कह रहे हैं कि गोरे अंग्रेजो का विरोध मंगल पांडेय ने किया था। वहीं काले अंग्रेजो का विरोध सुनील शुक्ला ने किया है।
दरअसल,सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और लगाए गए आरोपों को लेकर पुलिस कमिश्नर ने एक जांच कमेटी का गठन किया था। पुलिस कमिश्नर ने शुरुआत में जांच पुलिस लाइन के अधिकारियों को ही सौंप दी थी।जिसके बाद सुनील शुक्ला ने दूसरा वीडियो जारी किया। जिसके बाद जांच एडीसीपी लाइंस से हटाकर एडीसीपी पश्चिम को दी गई। इस मामले में एडीसीपी पश्चिमी ने सुनील शुक्ला को बयान देने के लिए एक नोटिस जारी किया था। इसके साथ ही पुलिस कमिश्नर ने इस मामले में निष्पक्ष जांच के लिए 12 कर्मियों को गणना कार्यालय से हटा दिया।
इस कार्रवाई के बाद सुनील शुक्ला का समर्थन करने वाले लोग इसे एक बड़ी जीत के रूप में देख रहे हैं। वहीं बीते मंगलवार सुनील शुक्ला ने इस मामले में कैसरबाग स्थित कार्यालय पहुंचकर अपने बयान दर्ज कराये हैं। सुनील शुक्ला के मुताबिक़ वह इस मामले में पीछे हटने वाले नहीं हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक सिपाही सुनील शुक्ला के कई वीडियो जारी होने के बाद उनके सहकर्मियों में भी हिम्मत बढ़ी है। वहीं सुनील शुक्ला की हिम्मत को लेकर लोग उसे तरह तरह की उपाधि दे रहे हैं।












