लखनऊ। भोगनीपुर में सामने आए लगभग 400 करोड़ रुपये के भूमि घोटाले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि निजी कंपनियों को सार्वजनिक संसाधनों और जनहित से जुड़े क्षेत्रों का नियंत्रण सौंपना कितना खतरनाक हो सकता है। सरकारी जमीन के दुरुपयोग, नियमों की खुलेआम अनदेखी, बैंक अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों की कथित मिलीभगत तथा चीटिंग, फर्जीवाड़ा और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोप निजीकरण मॉडल की वास्तविकता को उजागर करते हैं।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि जब निजी कंपनियां सरकारी जमीन और सार्वजनिक संसाधनों के साथ इस प्रकार की अनियमितताओं में लिप्त पाई जा रही हैं, तब प्रदेश के बिजली क्षेत्र को निजी हाथों में सौंपना जनता, किसानों और कर्मचारियों -तीनों के हितों के खिलाफ होगा।

संघर्ष समिति ने मांग की है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का प्रस्ताव तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। साथ ही पनकी तथा जवाहरपुर ताप बिजलीघरों के परिचालन एवं अनुरक्षण का कार्य 25 वर्षों के लिए निजी कंपनियों को देने का निर्णय भी सिरे से खारिज किया जाए।
संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली व्यवस्था कोई व्यावसायिक उत्पाद नहीं बल्कि जनता को दी जाने वाली मूलभूत सार्वजनिक सेवा है। निजी कंपनियों का मुख्य उद्देश्य अधिकतम लाभ कमाना होता है, जबकि सरकारी बिजली संस्थानों का उद्देश्य प्रदेश की जनता को सुरक्षित, सस्ती और निर्बाध विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराना है।
आज प्रदेश के सभी ऊर्जा निगमों, बिजलीघरों और परियोजनाओं में बिजली कर्मचारियों, संविदा कर्मियों, जूनियर इंजीनियरों तथा अभियंताओं ने पूरे दिन काली पट्टी बांधकर कार्य किया तथा कार्यालय समय के उपरांत व्यापक विरोध प्रदर्शन आयोजित किए। विरोध कार्यक्रमों में पनकी और जवाहरपुर ताप बिजली घरों के निजीकरण, आउटसोर्सिंग और संविदा कर्मियों की छंटनी के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई गई।
संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने कहा कि भोगनीपुर लैंड स्कैम में जिस प्रकार हिमावत पावर कंपनी एवं लैंको अनपरा पावर कंपनी पर चीटिंग, फर्जीवाड़ा और क्रिमिनल कांस्पिरेसी के आरोप सामने आए हैं, उससे यह स्पष्ट हो गया है कि उत्तर प्रदेश के पावर सेक्टर में निजी क्षेत्र का असली चरित्र क्या है और उनका वास्तविक उद्देश्य केवल निजी लाभ अर्जित करना है।
उन्होंने निजी कंपनियों, बैंक अधिकारियों तथा संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई प्रारंभ किए जाने के निर्णय का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री से अपील की कि निजी कंपनियों के इस चरित्र के उजागर होने के बाद उत्तर प्रदेश के बिजली क्षेत्र में निजीकरण संबंधी किसी भी प्रस्ताव को आगे न बढ़ाया जाए।
संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि वह निजीकरण की नीति पर पुनर्विचार करे, सरकारी बिजली संस्थानों को मजबूत बनाए, रिक्त पदों पर नियमित भर्ती करे तथा सार्वजनिक क्षेत्र की जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाए।
निजीकरण और उत्पीड़न के विरोध में चल रहे जनजागरण अभियान के अंतर्गत आज संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने सीतापुर और हरदोई में विरोध सभा की। विरोध सभा को संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारी मुख्यतया जितेन्द्र सिंह गुर्जर और महेन्द्र राय ने संबोधित किया। उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां के विरोध में 14 मई को लखनऊ में मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के मुख्यालय पर अपराह्न 2:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक विरोध सभा होगी।












