लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के आह्वान पर आज मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के अंतर्गत आने वाले जनपदों के बिजली कर्मचारियों, संविदा कर्मियों, जूनियर इंजीनियरों एवं अभियंताओं ने गोखले मार्ग स्थित मध्यांचल मुख्यालय पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि शांतिपूर्ण आंदोलन के बावजूद बिजली कर्मियों पर की गई उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस नहीं ली जाती हैं, तो बिजली कर्मचारी प्रदेशव्यापी आंदोलन को और तेज करने के लिए बाध्य होंगे।
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संघर्ष समिति ने बताया कि मार्च 2023 के आंदोलन के फलस्वरूप ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने संघर्ष समिति के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कॉरपोरेशन प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि उत्पीड़न की सभी कार्यवाहियां वापस ली जाएं। अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि तीन वर्ष से अधिक समय व्यतीत होने के बावजूद अब तक आंदोलन से संबंधित कार्यवाहियां वापस नहीं हुई हैं, जिससे कर्मचारियों में व्यापक आक्रोश व्याप्त है।
संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण के विरोध में पिछले 533 दिनों से चल रहे आंदोलन के दौरान बिजली कर्मचारियों ने उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इस दृष्टि से कार्यालय समय के उपरांत ही सभाएं एवं प्रदर्शन किए। इसके बावजूद बिजली कर्मियों का विभिन्न प्रकार से उत्पीड़न किया जा रहा है, जिससे ऊर्जा निगमों में अनावश्यक औद्योगिक अशांति पैदा हो रही है।
मध्यांचल मुख्यालय पर आयोजित विरोध सभा को संघर्ष समिति के प्रमुख पदाधिकारियों शैलेन्द्र दुबे, जितेन्द्र सिंह गुर्जर, महेन्द्र राय, पी.के. दीक्षित, सुहेल आबिद, चंद, मोहम्मद इलियास, सनाउल्लाह, सरजू त्रिवेदी, के.एस. रावत, आर सी पाल एवं जय गोविन्द ने मुख्यतया संबोधित किया












