Homeदेश (National)न अपहरण थमा, न दूसरे अपराध, फिर 'जंगलराज' खत्म होने का दावा...

न अपहरण थमा, न दूसरे अपराध, फिर ‘जंगलराज’ खत्म होने का दावा क्यों?

बिहार में जब-जब चुनाव होते हैं, ‘जंगलराज’ शब्द, राजनीति के केंद्र में आ जाता है। लालू यादव और राबड़ी देवी के शासन काल को राष्ट्रीय जनततांत्रिक गठबंधन (NDA) के नेता, ‘जंगलराज’ से बुलाते है। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हों या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हों, जनसभाओं में यह शब्द खूब गूंजता है।

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में अब लालू यादव, सलाहकार तक सीमित हो गए हैं, पार्टी की कमान तेजस्वी यादव के हाथ में आ गई है, फिर भी बिहार में ‘जंगलराज’ पर बहस खत्म नहीं हुई है। बिहार में करीब 2 दशक से कथित ‘सुशासन’ की सरकार है, क्या बिहार से अपराध खत्म हो गया है? नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े कुछ और इशारा कर रहे हैं।

यह भी पढ़ें: 3 साल में 11% बढ़ गए हिट एंड रन के केस, UP और मध्य प्रदेश सबसे आगे

क्या बिहार में खत्म हो गया है जंगलराज?

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, देश में हिंसक अपराधों की संख्या में बिहार, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश शीर्ष पर हैं। साल 2023 और 2024 दोनों में इन तीनों राज्यों में सबसे ज्यादा हिंसक अपराध दर्ज किए गए। साथ ही इन राज्यों में ऐसे मामलों में बहुत बड़ी बढ़ोतरी भी हुई है। 2024 में बिहार में 1,07,303 हिंसक अपराध हुए, जो 2023 के 52,165 मामलों से 105 प्रतिशत ज्यादा हैं। महाराष्ट्र में 87,791 हिंसक अपराध दर्ज किए गए, जो पिछले साल के 46,249 से 89 प्रतिशत अधिक हैं। उत्तर प्रदेश में 85,647 हिंसक अपराध हुए, जो 2023 के 49,453 से 73 प्रतिशत ज्यादा हैं।

यह भी पढ़ें: सरकारी आदेश न मानने में गुजराती सबसे आगे, NCRB रिपोर्ट में खुलासा

मणिपुर में 2023 में जातीय हिंसा के कारण 14,427 हिंसक अपराध हुए थे, जो 2024 में घटकर मात्र 1,614 रह गए। यानी यहां 89 प्रतिशत की भारी कमी दर्ज की गई। कुल आपराधिक मामलों की संख्या में भी उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर रहा। 2024 में 4,30,552 मामले दर्ज हुए, जो 2023 के 4,28,794 से थोड़ा सा ज्यादा है। महाराष्ट्र दूसरे स्थान पर रहा, जहां 2024 में 3,83,044 मामले दर्ज हुए। मध्य प्रदेश तीसरे स्थान पर है, जहां 2,82,874 मामले दर्ज किए गए। NCRB की इस रिपोर्ट से साफ है कि बिहार, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में हिंसक अपराधों पर लगाम लगाने की चुनौती बनी हुई है।

जिस अपहरण के लिए कुख्यात रहा बिहार, वहां का हाल क्या?

बिहार में 1990 से 2005 तक का दशक, अपहरण के लिए बदनाम रहा है। सबसे ज्यादा अपहरण की घटनाएं पूर्वांचल और बिहार से ही आती थीं। बिहार को अपराध की राजधानी का तमगा तक मिल गया था। उसी बिहार में आज भी अपहरण पूरी तरह से थमा नहीं है।

बिहार अपहरण वाले शीर्ष राज्यों में है

NCRB की रिपोर्ट के मुताबिक सबसे ज्यादा अपहरण के मामले महाराष्ट्र में हैं। कुल 13733 मामले, 2024 में सामने आए। दूसरे नंबर पर यूपी है, जहां 12163 मामले सामने आए। तीसरे नंबर पर राजस्थान है, जहां 9083 केस सामने आए। पश्चिम बंगाल चौथे नंबर पर है, जहां 7717 केस सामने आए, वहीं बिहार में 7305 केस सामने आए। बिहार में यह आंकड़े तब हैं, जब यहां सुशासन के दावे किए जाते हैं।

यह भी पढ़ें: साइबर अपराधों का शिकार हो रहीं महिलाएं, डराते हैं NCRB के आंकड़े, कैसे बचें?

‘जंगलराज’ शब्द आया कहां से है?

बिहार में 1990 से लेकर 2005 तक का दौर में अपराध अपने चरम पर रहा है। लालू प्रसाद यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी के 15 साल के शासन में यह शब्द, बढ़ते अपराध और कानून-व्यवस्था का प्रतीक बन गया था। 1999 और 2005 में दो बार राष्ट्रपति शासन भी लगा। साल 1997 में पटना हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच एक केस की सुनवाई कर रहा था। जस्टिस धर्मपाल सिन्हा और जस्टिस वीपी सिंह की बेंच ने पटना की खराब नागरिक सुविधाओं पर सुनवाई करते हुए टिप्पणी की थी, ‘यह जंगलराज से भी बुरा है।’ तब से ही यह शब्द बिहार में हर बार उठता है।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments