जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने खुद को महिला का दोस्त बताकर उसे ससुराल पक्ष के लोगों की ओर से बंधक बनाने के आरोप के साथ दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ता पर एक लाख रुपए का हर्जाना लगाते हुए राशि को राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा कराने को कहा है।
जस्टिस इन्द्रजीत सिंह और जस्टिस भुवन गोयल की खंडपीठ ने यह आदेश चन्द्र प्रकाश सोलंकी की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को खारिज करते हुए दिए। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि मामले में पुलिस की ओर से महिला और उसके पिता के बयान दर्ज किए हैं।
जिसमें महिला ने कहा कि उसे किसी भी व्यक्ति ने बंधक नहीं बनाया है और वह अपने ससुराल में रह रही है। इसी तरह उसके पिता ने भी कहा कि महिला अपनी इच्छा से ससुराल में रह रही है और वह किसी बंधन में नहीं है और न ही उस पर किसी तरह का दबाव है।
ऐसे में मामले में दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को खारिज किया जाता है। याचिका में अधिवक्ता एआर खान ने अदालत को बताया कि उसकी बचपन की दोस्त को उसके ससुराल में बंधक बनाकर रखा गया है।
ऐसे में पुलिस को निर्देश दिए जाए कि वह उसे बरामद कर अदालत में पेश करे। इस पर अदालत ने पूर्व में याचिकाकर्ता को याचिका की कोस्ट के तौर पर एक लाख रुपए जमा कराने को कहा था। वहीं अब अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया है।












