भारत और इटली निवेश, व्यापार और नई तकनीक की दिशा में सहयोग बढ़ाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इटली यात्रा को दौरान दोनों देशों ने यह फैसला लिया। इसके अलावा दोनों देश अपने रिश्तों को ‘विशेष रणनीतिक साझेदारी’ तक ले जाने पर भी सहमत है।
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार (भारतीय समयानुसार) को संयुक्त प्रेस वर्ता में कहा कि हमने भारत-इटली संबंधों को और मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा की। द्विपक्षीय बातचीत से पहले पीएम मोदी ने इतालवी राष्ट्रपति सर्जियो मैटरेला से मुलाकात की और व्यापार, निवेश और सांस्कृतिक जुड़ाव पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने एआई, महत्वपूर्ण खनिजों, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्र में सहयोग पर भी चर्चा की।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 मई से पांच देशों के आधिकारिक दौरे पर हैं। उनका पहला पड़ाव संयुक्त अरब अमीरात रहा। इसके बाद नीदरलैंड, स्वीडन, नार्वे और सबसे आखिरी में इटली पहुंचे। मंगलवार की रात इटली पहुंचने पर पीएम मोदी के सम्मान में रात्रिभोज आयोजित किया गया। मेलोनी अपने साथ पीएम मोदी को प्रतिष्ठित ‘कोलोसियम’ के दौरे पर अपने साथ ले गईं। पिछले कुछ वर्षों में भारत और इटली के रिश्तों में घनिष्ठता आई है। आर्थिक साझेदारी भी बढ़ रही है। 2025 में द्विपक्षीय व्यापार 14.25 बिलियन यूरो तक पहुंच चुका है। 2023 में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने मेलोनी भारत आ चुकी हैं।
भारत और इटली ने साल 2029 तक 20 बिलियन यूरो तक सालाना द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य तय किया है। पिछले साल भारत ने इटली को 8.55 बिलियन यूरो का निर्यात किया था, जबकि आयात 5.70 बिलियन यूरो का था।
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इटली यूरोपीय संघ में भारत का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है और उसने अपनी वैश्विक व्यापार रणनीति के तहत भारत को प्राथमिकता वाले देशों में से एक के रूप में चिन्हित किया है। यूरोपीय संघ में सबसे बड़ा भारतीय प्रवासी समूह इटली में रहता है। वर्तमान में 5,100 से अधिक भारतीय छात्र इटली के विश्वविद्यालयों में पढ़ाई कर रहे हैं।












