HomeHealth & Fitnessनौतपा में बढ़ी गर्मी, आयुर्वेद ने बताया बचाव का प्राकृतिक मार्ग

नौतपा में बढ़ी गर्मी, आयुर्वेद ने बताया बचाव का प्राकृतिक मार्ग

बस्ती – भीषण गर्मी और तेज धूप के बीच “नौतपा” का दौर शुरू हो चुका है। भारतीय ज्योतिष और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार नौतपा वर्ष का सबसे गर्म समय माना जाता है, जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है और लगातार नौ दिनों तक तापमान अत्यधिक बढ़ जाता है। वर्ष 2026 में नौतपा लगभग 25 मई से शुरू होकर 2 जून तक रहने की संभावना है।
इस संबंध में प्रो. डॉ. नवीन सिंह ने बताया कि आयुर्वेद में ग्रीष्म ऋतु को “पित्त बढ़ाने वाली ऋतु” माना गया है। इस दौरान शरीर में पित्त दोष बढ़ता है, जल की कमी होने लगती है तथा थकावट, कमजोरी, जलन और चक्कर जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। उन्होंने कहा कि अत्यधिक गर्मी शरीर की रस धातु को प्रभावित करती है, जिससे डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
प्रो. डॉ. नवीन सिंह ने बताया कि आधुनिक विज्ञान भी इस अवधि को स्वास्थ्य की दृष्टि से संवेदनशील मानता है। अधिक तापमान के कारण शरीर का प्राकृतिक कूलिंग सिस्टम कमजोर पड़ सकता है, जिससे हीट स्ट्रोक, लो ब्लड प्रेशर, अत्यधिक पसीना, त्वचा संबंधी समस्याएं और एसिडिटी जैसी परेशानियां उत्पन्न हो सकती हैं।
उन्होंने नौतपा के दौरान शीतल एवं हल्के आहार को अपनाने की सलाह दी। खीरा, तरबूज, खरबूजा, नारियल पानी, बेल का शरबत, सौंफ पानी, छाछ, जौ का पानी और मूंग दाल जैसे पदार्थ शरीर को ठंडक प्रदान करते हैं। इसके साथ ही गुलकंद, मिश्री, आंवला और सीमित मात्रा में एलोवेरा रस भी लाभकारी बताए गए हैं।
उन्होंने लोगों को अत्यधिक मसालेदार भोजन, तला-भुना खाना, अधिक चाय-कॉफी, शराब, धूम्रपान तथा खाली पेट धूप में निकलने से बचने की सलाह दी। बहुत ठंडा फ्रिज का पानी पीना भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताया गया।
प्रो. डॉ. नवीन सिंह के अनुसार नौतपा में दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक तेज धूप से बचना चाहिए। बाहर निकलते समय सिर ढककर निकलें, सूती वस्त्र पहनें तथा बार-बार पानी, ORS या नींबू पानी का सेवन करते रहें। पर्याप्त नींद और आराम भी शरीर को संतुलित रखने के लिए आवश्यक है।
उन्होंने आयुर्वेदिक दिनचर्या में चंदन, गुलाब जल, ठंडे पानी से आंखें धोने तथा पैरों के तलवों में घी लगाने को लाभकारी बताया। साथ ही चेतावनी दी कि तेज सिरदर्द, चक्कर, उल्टी, अत्यधिक प्यास, शरीर का बहुत गर्म होना या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।
प्रो. डॉ. नवीन सिंह ने कहा कि नौतपा केवल गर्मी का समय नहीं बल्कि शरीर की सहनशक्ति की परीक्षा भी है। यदि इस दौरान संतुलित आहार, पर्याप्त जल सेवन और आयुर्वेदिक जीवनशैली अपनाई जाए तो शरीर को स्वस्थ एवं ऊर्जावान रखा जा सकता है।

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