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CBSE का बड़ा फैसला, अब स्कूलों में मैथिली पढ़कर जड़ें मजबूत करेंगे बच्चे

मिथिला की संस्कृति की पहचान मानी जाने वाली मैथिली भाषा को अब एक बहुत बड़ी खुशी मिली है। काफी समय से लोग इसकी मांग कर रहे थे और अब केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने मैथिली को अपने स्कूलों की पढ़ाई में शामिल करने का फैसला लिया है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 से छात्र दसवीं क्लास और उससे ऊपर की कक्षाओं में मैथिली विषय पढ़ सकेंगे। इस फैसले से मिथिलांचल के लोगों में बहुत खुशी है।

मैथिली को सीबीएसई के कोर्स में शामिल करने की मांग सालों से चल रही थी। अब शिक्षा मंत्रालय और एनसीईआरटी की कोशिशों के बाद इसे कंफर्म कर दिया गया है। केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने सांसद गोपाल ठाकुर को पत्र भेजकर बताया कि नई शिक्षा नीति 2020 के तहत अपनी भाषा में पढ़ाई को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इसी के चलते मैथिली को स्कूल की पढ़ाई में जगह दी गई है। एनसीईआरटी ने मैथिली के साथ-साथ 121 भारतीय भाषाओं में बच्चों की पढ़ाई के लिए किताबें और शुरुआती सामान तैयार किया है। साथ ही कई और किताबों को मैथिली में ट्रांसलेट भी किया जा रहा है।

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बच्चों के लिए नई शुरुआत

मैथिली सिर्फ बातचीत की भाषा नहीं है बल्कि यह लोकगीत, साहित्य, परंपरा और सामाजिक पहचान का एक बड़ा हिस्सा है। सीबीएसई ने अपनी वेबसाइट पर मैथिली का सिलेबस भी डाल दिया है। इससे उन छात्रों को बहुत फायदा होगा जो प्रतियोगी परीक्षाओं या रिसर्च में रुचि रखते हैं। इसके अलावा मैथिली के शिक्षकों के लिए भी नौकरी के नए अवसर मिलेंगे।

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नेताओं ने किया स्वागत

भाजपा नेता रितुराज सिन्हा ने इस फैसले के लिए केंद्र सरकार का शुक्रिया अदा किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय भाषाओं को जो सम्मान मिल रहा है यह उसी का नतीजा है। मिथिला क्षेत्र में लोग इसे भाषा के सम्मान के रूप में देख रहे हैं। शिक्षा के जानकारों का कहना है कि यह फैसला सिर्फ मैथिली तक नहीं रुकेगा बल्कि देश की दूसरी भाषाओं को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा देगा। मैथिली के लिए यह सिर्फ एक विषय के जुड़ने की खबर नहीं है बल्कि अपनी संस्कृति को फिर से नई पहचान दिलाने की शुरुआत है।

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