लखनऊ। अंतरराष्ट्रीय माहवारी स्वच्छता दिवस के उपलक्ष्य में शनिवार को क्वीन मेरी अस्पताल में नर्सिंग विद्यार्थियों द्वारा माहवारी स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से नुक्कड़ नाटक का मंचन किया गया। इस अवसर पर पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया,जिसमें विद्यार्थियों ने रचनात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से माहवारी स्वच्छता और उससे जुड़े महत्वपूर्ण संदेशों को प्रभावी ढंग से प्रदर्शित किया। प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की अध्यक्ष डॉ.अंजू अग्रवाल ने कहा कि माहवारी स्वच्छता जननांग संक्रमण तथा गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर (सर्वाइकल कैंसर) जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की रोकथाम के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। सर्वाइकल कैंसर का संबंध कुछ संक्रमणों,विशेष रूप से एचपीवी संक्रमण,से होता है। उन्होंने बताया कि माहवारी शुरू होने की सामान्य आयु 9 से 14 वर्ष के बीच होती है। इसलिए नौ से दस साल की आयु से ही किशोरियों को इसके बारे में जागरूक करना आवश्यक है,विशेषकर तब जब उनमें किशोरावस्था की शुरुआत के संकेत दिखाई देने लगे,जैसे स्तनों का विकास होना और शरीर में अन्य शारीरिक परिवर्तन शुरू होना। वर्तमान सामाजिक परिवेश को देखते हुए किशोरियों को सुरक्षित यौन व्यवहार के बारे में भी शिक्षित किया जाना चाहिए। उन्हें अनचाहे गर्भधारण और यौन संचारित संक्रमणों से बचाव के उपायों की जानकारी दी जानी चाहिए। गर्भनिरोधक साधनों के बारे में सही जानकारी और कंडोम के उपयोग के महत्व को समझाना आवश्यक है। डॉ.सुजाता देव ने बताया कि किशोरियां एवं महिलाएं माहवारी प्रबंधन के लिए सेनेटरी नैपकिन,टैम्पॉन, मेंस्ट्रुअल कप, पीरियड पैंटी अथवा साफ कपड़े का उपयोग कर सकती हैं। हालांकि किसी भी विकल्प का उपयोग करते समय हाथों को साबुन और पानी से अच्छी तरह धोना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि सेनेटरी पैड या टैम्पॉन को हर 4 से 6 घंटे में बदलना चाहिए। यदि कपड़े का उपयोग किया जा रहा है, तो उसे साबुन और पानी से अच्छी तरह धोकर धूप में सुखाना चाहिए। मेंस्ट्रुअल कप का उपयोग 12 घंटे तक किया जा सकता है,लेकिन प्रत्येक उपयोग के बाद उसे साबुन और पानी से अच्छी तरह साफ करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि उपयोग किए गए पैड का सुरक्षित निस्तारण संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए महत्वपूर्ण है। इस्तेमाल किए गए पैड को कागज में लपेटकर ढक्कन वाले कूड़ेदान में डालना चाहिए। उन्होंने कहा कि किशोरियों और महिलाओं की सुविधा के लिए विद्यालयों, महाविद्यालयों, कार्यस्थलों तथा सार्वजनिक स्थानों पर पीरियड-फ्रेंडली शौचालयों की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए, जहां स्वच्छ पानी, साबुन, निजी स्थान और सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था हो।
सर्वाइकल कैंसर के खतरे को किया जा सकता है कम:डॉ.अंजू अग्रवाल
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