सिद्धार्थनगर में तेतरी-सोहांस-लोटन मार्ग पर निर्माणाधीन पुल के निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने कार्य की धीमी प्रगति पर नाराजगी व्यक्त की। रविवार को हुए निरीक्षण में निर्माण स्थल पर केवल चार मजदूर काम करते पाए गए। जिलाधिकारी ने लोक निर्माण विभाग (प्रांतीय खंड) के सहायक अभियंता राजकुमार मौर्य और अवर अभियंता लालचंद पटेल, मनोज पासवान तथा सोहनलाल के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की है। जिलाधिकारी ने अधिकारियों, तकनीकी कर्मचारियों और कार्यदायी संस्था के प्रतिनिधियों से कार्य की प्रगति, गुणवत्ता और समय-सीमा की विस्तृत जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि पुल निर्माण का अनुबंध हुआ था और इसे 18 फरवरी 2026 तक पूरा किया जाना है। हालांकि, अनुबंध के तीन माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अब तक केवल 10 प्रतिशत कार्य ही पूरा हो सका है। इस धीमी प्रगति को गंभीर लापरवाही मानते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि शासन की प्राथमिकता वाली परियोजनाओं में अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कार्यदायी संस्था को निर्देश दिया कि वह निर्माण कार्य में तेजी लाने के लिए अतिरिक्त संसाधन, मशीनरी और श्रमिकों की व्यवस्था करे, ताकि पुल का निर्माण निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा हो सके। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कार्य की गति में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों के खिलाफ और कठोर कार्रवाई की जाएगी। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण में उपयोग होने वाली सामग्री निर्धारित मानकों के अनुरूप होनी चाहिए और गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि विकास कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। जिलाधिकारी ने निर्माण स्थल पर मौजूद सुरक्षा व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया। उन्होंने श्रमिकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराने, चेतावनी संकेतक लगाने तथा कार्यस्थल पर सभी सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही संबंधित अधिकारियों को नियमित रूप से स्थल निरीक्षण कर कार्य की प्रगति की निगरानी करने को कहा।
तेतरी-सोहांस-लोटन मार्ग क्षेत्र के लिए यह पुल महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके निर्माण से स्थानीय लोगों को आवागमन में सुविधा मिलने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी। ऐसे में निर्माण कार्य की धीमी गति को लेकर प्रशासन ने गंभीर रुख अपनाया है। जिलाधिकारी की कार्रवाई को विकास कार्यों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के लिए स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि परियोजनाओं में देरी और उदासीनता अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।












