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बाहुबली बृजेश सिंह के खिलाफ काशी मेंं प्रदर्शन, “त्राहिमाम, माफिया से धर्म बचाओ” जैसे नारे लगे

वाराणसी। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में मंगलवार को पूर्व एमएलसी एवं बाहुबली बृजेश कुमार सिंह उर्फ अरुण सिंह के खिलाफ केसरिया भारत संगठन, पुजारियों और ब्राह्मण समाज के लोगों ने जिला मुख्यालय कचहरी परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कारियों ने “त्राहिमाम, माफिया से धर्म बचाओ” जैसे नारे लगाते हुए श्री जगन्नाथ मंदिर ट्रस्ट के संचालन और पुजारियों के कथित उत्पीड़न का मुद्दा उठाया। प्रदर्शन के बाद संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की।

संगठन के प्रमुख संयोजक कृष्णानंद पांडेय ने आरोप लगाया कि पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह से जुड़े कुछ लोग मंदिर के पुजारियों और उनके परिवारों पर आवास खाली करने का दबाव बना रहे हैं तथा उनके साथ अभद्र व्यवहार किया जा रहा है। खुद को मंदिर का पुजारी बताने वाले रत्नेश्वर चतुर्वेदी ने दावा किया कि उनके परिवार की पांच पीढ़ियां अस्सी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में नियमित पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों का कार्य करती रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में मंदिर परिसर में रह रहे उनके परिवार के लगभग 15 सदस्यों को आवास छोड़ने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।

रत्नेश्वर चतुर्वेदी ने यह भी आरोप लगाया कि उनके पूर्वजों को मंदिर में वेतनभोगी पुजारी-सेवादार के रूप में नियुक्त किया गया था, लेकिन कई पीढ़ियों का बकाया वेतन अब तक नहीं मिला है। उनका कहना है कि वे मंदिर के विकास और उसे भव्य स्वरूप दिए जाने के पक्षधर हैं। लेकिन पुजारियों के पुनर्वास और बकाया वेतन के भुगतान की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

उल्लेखनीय है कि बृजेश कुमार सिंह को हाल ही में वाराणसी के प्रसिद्ध लक्खा रथयात्रा मेले तथा अस्सी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर ट्रस्ट का मुख्य ट्रस्टी (अध्यक्ष) बनाया गया है। मंदिर प्रबंधन से जुड़े शापुरी परिवार द्वारा उन्हें ट्रस्ट में शामिल किए जाने के बाद से कुछ सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों के नेताओं ने इस पर सवाल उठाए हैं।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि धार्मिक संस्थाओं का संचालन अधिक पारदर्शी और सहभागी होना चाहिए तथा यह केवल सीमित व्यक्तियों के नियंत्रण में नहीं रहना चाहिए। वहीं, इस पूरे मामले में समाचार लिखे जाने तक जिला प्रशासन अथवा मंदिर ट्रस्ट की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

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