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बस्ती में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बस्ती नगर पालिका परिषद को बड़ा झटका दिया है। आयोग ने नगर पालिका द्वारा जारी 56,938 रुपये के जलकर नोटिस को निरस्त कर दिया है। साथ ही, आयोग ने सेवा में कमी मानते हुए परिवादी को 45 हजार रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है। जेल रोड सिविल लाइन निवासी रामप्रकाश सिंह और अन्य ने आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि उनके पुराने मकान पर कोई कर बकाया नहीं था। नगर पालिका ने वर्ष 2024-25 के लिए 28,469 रुपये का वाटर टैक्स नोटिस भेजा था, जिसे उन्होंने 12 अप्रैल 2024 को जमा कर दिया था। इसके बावजूद, विभागीय लापरवाही के कारण उनके मकान तक जलापूर्ति शुरू नहीं की गई। परिवादी ने आयोग को बताया कि पानी की सुविधा न मिलने के कारण उन्हें अपने खर्च पर हैंडपंप लगवाकर पेयजल की व्यवस्था करनी पड़ी। शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि नगर पालिका ने जलापूर्ति उपलब्ध कराए बिना ही जलकर वसूला और बाद में 56,938 रुपये का बकाया दर्शाते हुए एक नया नोटिस जारी कर दिया। मामले की सुनवाई जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश अमरजीत वर्मा और सदस्य अजय प्रकाश सिंह की पीठ ने की। आयोग ने नगर पालिका को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया, लेकिन नगर पालिका की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ। इसके बाद आयोग ने एकपक्षीय सुनवाई करते हुए परिवादी के साक्ष्यों का परीक्षण किया। आयोग ने अपने निर्णय में कहा कि वर्ष 2024-25 का वाटर टैक्स प्राप्त करने के बावजूद उसे अभिलेखों में दर्ज नहीं किया गया। यह नगर पालिका की कार्यप्रणाली और सेवा में गंभीर कमी को दर्शाता है। आयोग ने 56,938 रुपये के नोटिस को निरस्त करते हुए परिवादी को मानसिक एवं आर्थिक क्षति के लिए 45 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया।
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जलापूर्ति न देने पर उपभोक्ता आयोग का फैसला:बस्ती नगर पालिका का 56 हजार का बिल रद्द, 45 हजार मुआवजा देने का आदेश
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