HomeHealth & Fitnessबासमती की खेती से चमकेगी किसानों की किस्मत

बासमती की खेती से चमकेगी किसानों की किस्मत

बासमती की खेती: भारत सहित पूरी दुनिया में बासमती चावल की डिमांड हमेशा सातवें आसमान पर रहती है. अपनी लाजवाब खुशबू और लंबे दानों के कारण बासमती को धान की फसलों का राजा कहा जाता है. यही वजह है कि हमारे किसान भाई इसकी खेती की तरफ सबसे ज्यादा अट्रैक्ट होते हैं, क्योंकि इसकी सही पैदावार सीधे बंपर मुनाफे की गारंटी देती है. लेकिन कई बार पूरी मेहनत करने के बाद भी किसानों को वो क्वालिटी और क्वांटिटी नहीं मिल पाती. 

जिसकी वे उम्मीद करते हैं. असल में बासमती की खेती सामान्य धान से थोड़ी अलग और स्मार्ट केयर मांगती है. अगर आप भी इस सीजन में अपनी बासमती की फसल से रिकॉर्ड तोड़ उत्पादन और टॉप क्लास क्वालिटी हासिल करना चाहते हैं. तो आपको कुछ बेहद जरूरी और सीक्रेट टिप्स को फॉलो करना होगा जो आपकी किस्मत बदल सकते हैं.

ऐसे करें नर्सरी की तैयारी 
बासमती धान का सुपरहिट प्रोडक्शन पूरी तरह से इस बात पर टिका होता है कि आपकी नर्सरीकितनी हेल्दी तैयार हुई है. बुवाई के लिए हमेशा भरोसेमंद सोर्स से प्रमाणित और एकदम शुद्ध बीजों का ही सिलेक्शन करें. जब नर्सरी में पौधे करीब 20 से 25 दिन के ह ट्रांसप्लांट करने का बिल्कुल सही समय होता है. 

सही रोपाई से रखें बंपर पैदावार की नींव
रोपाई करते समय पौधों के बीच की दूरी का विशेष ध्यान रखें; न तो उन्हें बहुत पास-पास लगाएं और न ही बहुत दूर. सही गैप होने से हर एक पौधे को हवा, धूप और मिट्टी से न्यूट्रिएंट्स बराबर मात्रा में मिलते हैं. इसके अलावा रोपाई के शुरुआती दो हफ्तों तक खेत में हल्का पानी बनाकर रखना बेहद जरूरी है जिससे पौधों की जड़ें मिट्टी को अच्छी तरह पकड़ सकें और कल्ले निकलने की शुरुआत शानदार हो.

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संतुलित पोषण जरूरी
धान की फसल को सिर्फ खाद देना काफी नहीं है, बल्कि बासमती के मामले में बैलेंस्ड न्यूट्रिशन और सही समय पर सिंचाई ही असली गेम चेंजर साबित होती है. खेत तैयार करते समय नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश के साथ-साथ जिंक सल्फेट का इस्तेमाल जरूर करें. क्योंकि जिंक की कमी से बासमती की ग्रोथ अचानक रुक जाती है. 

पानी देने का खास ध्यान रखें
पानी के मैनेजमेंट की बात करें तो फसल में फूल आने और दाना भरते समय खेत में नमी की जरा भी कमी नहीं होनी चाहिए, वरना दाने पतले और कमजोर रह जाएंगे. इसके साथ ही, कीड़ों और बीमारियों से बचाव के लिए जैविक और रासायनिक दवाओं का सही तालमेल बिठाएं. जब फसल पककर तैयार हो जाए तो कटाई सही समय पर करें ताकि दानों में चमक बनी रहे और आपको मार्केट में इसका सबसे प्रीमियम रेट मिले.

 

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