लखनऊ। जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने श्रीराम कथा के सप्तम दिवस केवट प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि हमारे वेदों, इतिहास, पुराणों और श्रुतियों में कहीं भी ऊंच-नीच की भावना नहीं है। भारतीय संस्कृति में जिसके हृदय में राम नहीं हैं वह छोटा है और जिसके हृदय में राम हैं वही बड़ा है।
सीतापुर रोड स्थित बृज की रसोई परिसर में चल रही रामकथा में जगद्गुरू ने कहा कि भक्ति मुक्ति से बड़ी होती है और मोक्ष से भी श्रेष्ठ होती है। रावण, कंस और शिशुपाल जैसे असुरों को भी मोक्ष प्राप्त हुआ किंतु उन्हें भक्ति नहीं मिली।
पादसेवन भक्ति की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि भक्ति गंगा है, विद्या नाव है और विद्वान केवट है। रामभक्ति प्राप्त हो जाए तो विद्या पर स्वयं ब्रह्म विराजमान हो जाता है। रामभद्राचार्य ने आवा हो मोरे नाव के खेवैया तथा राघव तुम बिन सूनी मोरी नैया जैसे भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। पूरा पंडाल भक्तिरस में डूब गया और श्रोता देर तक भजनों के साथ झूमते रहे।
उन्होंने कहा कि लखनऊ को भगवान लक्ष्मण ने बसाया और लाखन पासी ने सजाया। लाखन पासी का नाम भी लक्ष्मण के नाम पर ही पड़ा। लक्ष्मण टीला प्रकरण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वह उस दिन लक्ष्मण टीला का दर्शन करेंगे जब वहां भगवान लक्ष्मण का भव्य मंदिर बन जाएगा।
उन्होंने कहा कि हम किसी के विरोधी नहीं हैं और सह-अस्तित्व में विश्वास करते हैं। किंतु भारत में रहना है तो वंदे मातरम कहना होगा और राष्टï्रगीत गाना पड़ेगा। बाबर और अकबर के नहीं रघुवर के होकर रहो। कथा के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, वरिष्ठ भाजपा नेता नीरज सिंह, सहित काफी गणमान्य लोगों ने व्यासपीठ का आशीर्वाद प्राप्त किया।












