Homeदेश (National)बच्चों की आवाज, सीक्रेट बेस, खुफिया कैमरे; इजरायली मिलिट्री के हैरतअंगेज कारनामे

बच्चों की आवाज, सीक्रेट बेस, खुफिया कैमरे; इजरायली मिलिट्री के हैरतअंगेज कारनामे

इजरायल रणभूमि में नए-नए कौशल की खातिर जाना जाता है। अपने दुश्मन को चकमा देना और घात लगाकर गहरी चोट पहुंचाना उसे बखूबी आता है। उसके खुफिया ऑपरेशन न केवल दुनिया को हैरान करते हैं, बल्कि दुश्मनों में खौफ की लहर पैदा करते हैं। 7 अक्टूबर 2023 के बाद से इजरायल लगातार जंग में है। सबसे पहले उसकी लड़ाई गाजा में हमास के साथ चली। बाद में लेबनान से हिजबुल्लाह से मोर्चा खोला। यह जंग आज भी जारी है।

इसी अवधि में करीब चार बार ईरान से भी झड़प हुई। पिछले साल जून महीने में अमेरिका और इजरायल ने एक साथ ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर बमबारी की। करीब 12 दिनों बाद युद्ध थमा, लेकिन बादल और गहराते रहे। 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने एक साथ ईरान पर व्यापक तबाही मचाई। सुप्रीम लीडर अली खामेनेई समेत टॉप मिलिट्री नेतृत्व का खात्मा किया। बीच-बीच में कई खुफिया रिपोर्ट्स में इजरायल की मिलिट्री तरकीब का खुलासा हुआ। इन तरकीब ने न केवल ईरान, बल्कि दुनिया को भी हैरत में डाल दिया। आइये आज बात करते हैं कि इजरायल के इन्हीं हैरतअंगेज मिलिट्री कारनामों की…

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खुफिया कैमरों से खामेनेई तक: ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई को मारना इतना भी आसान नहीं था। वह कहां रह रहे थे और किससे मिल रहे थे… यह किसी को नहीं पता था। मगर मोसाद ने उनकी सुरक्षा में सेंधमारी की। पूर्व इजरायली खुफिया अधिकारियों के हवाले से फाइनेंशियल टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि इजरायल ने कई वर्षों तक तेहरान के ट्रैफिक कैमरों को हैक किया। फोन नेटवर्क में घुसपैठ की। हर एक फुटेज को इजरायल पहुंचाया गया।

तेहरान के पाश्चर स्ट्रीट स्थित खामेनई के घर की हर गतिविधि पर नजर रखी गई। खामेनेई की सुरक्षा में कौन-कौन तैनात है, कितने घटें की ड्यूटी है, उनका पता क्या है, काम पर आने और जाने का रास्ता क्या है? यह सब जानकारी इजरायल के पास थी। जब इजरायल को सटीक तौर पर खामेनेई के ठिकानों का पता चला गया तो इसके बाद तेहरान में उस इलाके के कुछ मोबाइल टावरों को बाधित किया गया, जहां खामेनेई ठहरे थे। इससे मोबाइल बिजी आने लगे और खामेनेई की सुरक्षा में तैनात टीम तक अलर्ट को पहुंचने से रोका गया।

इराक में खुफिया अड्डा: किसी दूसरे देश में सीक्रेट मिलिट्री बेस बनाना, यह उस देश की कबीलियत को साबित करता है। हाल ही में ईरान के खिलाफ जंग में इजरायल ने यह भी कर दिखाया है। उसने ईरान के पड़ोसी देश इराक में एक सीक्रेट मिलिट्री बेस बनाया, ताकि ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान में सेना की मदद की जा सके। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक इजरायल ने यहां से ईरान की निगरानी की। अपनी सेना को खुफिया जानकारी और लॉजिस्टिक सपोर्ट उपलब्ध कराया।

दूसरे देश में बनाया लॉजिस्टिक हब: अमेरिकी मीडिया सीएनएन ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि ईरान के खिलाफ जंग में इजरायल ने सोमालीलैंड और अजरबैजान में खुफिया ठिकाने बनाए थे। संघर्ष में इनका इस्तेमाल भी किया। अजरबैजान की सीमा ईरान से लगती है। रिपोर्ट में कहा गया कि ईरान सीमा के करीब मोसाद के एजेंट और इजरायल की स्पेशल फोर्स तैनात थी। यहां से ड्रोन हमलों को अंजाम दिया गया। ईरान की जासूसी की गई। किसी भी इजरायली जहाज के गिरने पर पायलटों के रेस्क्यू के खातिर स्पेशल फोर्स को तैनात किया गया था। हालांकि अजरबैजान ने रिपोर्ट का खंडन किया है। सोमालीलैंड में इजरायल ने लॉजिस्टिक हब बनाया। इसका इस्तेमाल फाइटर में दोबारा ईंधन भरने में किया गया।

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ड्रोन निकाल रहे आवाज: 2024 में इजरायल ने लेबनान में हिजबुल्लाह पर पेजर अटैक किया था। करीब 4 हजार लड़ाकों को चोट आई थी और कई की जान गई थी। अचानक जेब, हाथ और अन्य स्थानों पर रखे पेजर में एक साथ धमाकों से हड़कंप मच गया था। अब इजरायल एक और तरकीब का इस्तेमाल कर रहा है।

दक्षिण लेबनान में इजरायली ड्रोन बच्चों के रोने, महिलाओं के मदद मांगने, एंबुलेंस के सायरन की आवाज निकाल रहे हैं। कुछ आवाजों में मदद की गुहार लगाई जा रही है। दरअसल, भीषण बमबारी के बावजूद भी लोगों ने अपने घरों को न छोड़ने का फैसला किया है। अब इजरायल इन आवाजों से लोगों को डराने और जिज्ञासा बस घर से बाहर निकालने की खातिर कर रहा है।

कुछ गांवों में सिर्फ हिजबुल्लाह के लड़ाके छिपे हैं। माना जा रहा है कि इजरायल इन आवाजों का इस्तेमाल लड़ाकों को बाहर निकालने और उन पर हमला करने के उद्देश्य से भी कर रहा है। इससे इजरायल को एक और बढ़त मिलती है। अगर कोई वास्तव में मदद की गुहार लगा रहा तो लोग उसे ड्रोन की आवाज समझकर अनसुना कर देते हैं।

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