श्रावस्ती जनपद के नसीरगंज कस्बे और चौगाई क्षेत्र में मोहर्रम की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसी क्रम में मजलिसों का सिलसिला भी आरंभ हो गया है। शिया समुदाय द्वारा आयोजित इन मजलिसों में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हो रहे हैं। इन मजलिसों के दौरान हजरत इमाम हुसैन की शहादत और उनकी महान कुर्बानियों को याद किया जा रहा है। वक्ताओं ने बताया कि कर्बला के मैदान में इमाम हुसैन ने जुल्म और अन्याय के खिलाफ डटकर मुकाबला किया था। उन्होंने कठिन परिस्थितियों और पानी की किल्लत के बावजूद इंसाफ और सच्चाई का रास्ता नहीं छोड़ा। मजलिसों में नौहे पढ़े जा रहे हैं और अकीदतमंद मातम कर इमाम हुसैन को खिराज-ए-अकीदत पेश कर रहे हैं। इस दौरान पूरा माहौल ‘या हुसैन’ की सदाओं से गूंज उठता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, 10 मोहर्रम को यौमे आशूरा कहा जाता है। इसी दिन इमाम हुसैन ने अपने परिवार और साथियों के साथ शहादत कुबूल की थी। उनकी यह कुर्बानी आज भी मानवता को अन्याय के खिलाफ खड़े होने और सच्चाई के रास्ते पर चलने का संदेश देती है। मोहर्रम की आमद के साथ ही क्षेत्र में अकीदत और ग़म का माहौल गहराता जा रहा है। आने वाले दिनों में मजलिसों और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों की संख्या और बढ़ने की उम्मीद है।
श्रावस्ती में मोहर्रम की तैयारियां शुरू:मजलिसों में इमाम हुसैन की शहादत और कुर्बानियों को किया याद
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