HomeHealth & Fitnessमानवीय एवं सुरक्षित कार्य परिस्थितियां सुनिश्चित की जाए : संघर्ष समिति

मानवीय एवं सुरक्षित कार्य परिस्थितियां सुनिश्चित की जाए : संघर्ष समिति

लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने बिजली निगमों में कार्यरत संविदा कर्मियों की लगातार बिगड़ती कार्य परिस्थितियों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि विद्युत व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने में संविदा कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका होने के बावजूद उनकी समस्याओं की लगातार उपेक्षा की जा रही है।
संघर्ष समिति ने कहा कि विभिन्न समाचार माध्यमों में प्रकाशित रिपोर्टों तथा जमीनी हकीकत से स्पष्ट है कि संविदा कर्मियों पर कार्य का अत्यधिक दबाव है। पर्याप्त संख्या में कर्मियों की उपलब्धता न होने के कारण शेष कर्मियों से लगातार अतिरिक्त कार्य लिया जा रहा है। अनेक स्थानों पर संविदा कर्मी प्रतिदिन आठ घंटे से अधिक तथा सप्ताह के सातों दिन कार्य करने को विवश हैं,जबकि श्रम कानूनों एवं निर्धारित नियमों के अनुसार उन्हें साप्ताहिक अवकाश एवं निर्धारित कार्य अवधि का अधिकार प्राप्त है।संघर्ष समिति ने कहा कि विद्युत क्षेत्र में कार्य स्वभावतः जोखिमपूर्ण है। लाइन पर कार्य करते समय,फाल्ट दुरुस्ती,ट्रांसफार्मर एवं उपकेंद्रों पर कार्य के दौरान संविदा कर्मियों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण,प्रशिक्षण तथा संसाधन उपलब्ध कराना प्रबंधन की जिम्मेदारी है। दुर्भाग्यवश संसाधनों एवं सुरक्षा उपायों की कमी के कारण लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं और कई संविदा कर्मी अपनी जान गंवा चुके हैं। यह अत्यंत चिंताजनक स्थिति है। संघर्ष समिति ने मांग की है कि—निजीकरण के नाम पर हटाए गए 25000 से अधिक संविदा कर्मियों को तत्काल नौकरी पर वापस लिया जाए, सभी संविदा कर्मियों के लिए प्रतिदिन अधिकतम आठ घंटे से अधिक की ड्यूटी न ली जाए,प्रत्येक संविदा कर्मी को सप्ताह में एक दिन सवेतन अवकाश दिया जाए,अवकाश अथवा निर्धारित समय से अतिरिक्त कार्य लेने पर ओवरटाइम का भुगतान किया जाए, सभी संविदा कर्मियों को गुणवत्तापूर्ण सुरक्षा उपकरण, प्रशिक्षण एवं आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, दुर्घटना की स्थिति में प्रभावित कर्मियों एवं उनके परिवारों को पर्याप्त आर्थिक सहायता एवं सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जाए, रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती कर कार्यरत कर्मियों पर बढ़ते कार्यभार को कम किया जाए, संविदा कर्मियों के मानदेय, सेवा सुरक्षा एवं अन्य सुविधाओं से संबंधित लंबित समस्याओं का समाधान वार्ता के माध्यम से किया जाए।

 
 
 
 
 
 
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