नवाबगंज क्षेत्र में इस बार मोहर्रम के ताजिए छोटे आकार के दिखाई देंगे। प्रशासन की अपील के बाद ताजिया बनाने वाले कारीगरों ने इनकी लंबाई कम कर दी है। यह निर्णय ताजिए को बिना किसी बाधा के कर्बला तक ले जाने की सुविधा के लिए लिया गया है। रामनगर, सेमरा, नानपारा और नवाबगंज जैसे मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में मोहर्रम के दौरान ताजिए रखने की परंपरा है। कस्बा नवाबगंज, केवलपुर, नौबस्ता, रहीम नगर, मिर्जापुर, धर्मनगर, भटपुरवा, मंसूग गाँव, मिरज़ा फाटां, रहीम नगर और मनिहारन गाँव सहित कई स्थानों पर हिंदू-मुस्लिम समुदाय के लोग श्रद्धापूर्वक ताजिए स्थापित करते हैं। ये ताजिए इमाम हुसैन की कर्बला में शहादत की याद में बनाए जाते हैं। अब तक नवाबगंज बाजार में ताजिया की दुकानों पर अकीदतमंद 100 फीट, 70 फीट, 50 फीट और 40 फीट तक के बड़े ताजिए रखते आ रहे थे। इन विशाल ताजिए को बनाने और स्थापित करने की परंपरा रही है। हालांकि, इस बार प्रशासन ने ताजिया ले जाने में संभावित बाधाओं को देखते हुए इनकी लंबाई कम करने की अपील की थी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ताजिए को आसानी से और बिना किसी रुकावट के कर्बला तक पहुंचाया जा सके। प्रशासन की इस अपील के बाद, नवाबगंज क्षेत्र के ताजिया बनाने वाले कारीगरों ने ताजिए की लंबाई छोटी कर दी है। नतीजतन, इस वर्ष मोहर्रम के जुलूसों में बड़े ताजिए नहीं दिखेंगे।
नवाबगंज में अब नहीं दिखेंगे बड़े ताजिए:प्रशासन की अपील पर कारीगरों ने लंबाई घटाई
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