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मदनपुरा गो-सदन बंद होने से किसानों में भारी आक्रोश, फसलों की सुरक्षा पर मंडराया संकट

*अव्यवस्थाओं और विवादों के कारण सुर्खियों में रहा गो-सदन हुआ शिफ्ट; दूर-दराज के केंद्रों पर पशु ले जाने को मजबूर ग्रामीण।*

रिपोर्ट:हेमन्त कुमार दुबे।

महराजगंज। योगी सरकार द्वारा निराश्रित गोवंश के संरक्षण और किसानों की फसलों को आवारा पशुओं से बचाने के लिए मिठौरा ब्लॉक के मदनपुरा में स्थापित किया गया गो-सदन आखिरकार बंद कर दिया गया है। शासन के नए दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए इस गो-सदन के सभी पशुओं को सदर स्थित लक्ष्मीपुर कोर्ट में शिफ्ट कर दिया गया है। इस फैसले के बाद से मदनपुरा और उसके आसपास के दर्जनों गांवों के किसानों में अपनी फसलों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता और नाराजगी देखी जा रही है।
मदनपुरा गो-सदन का इतिहास लगातार विवादों और प्रशासनिक लापरवाही से भरा रहा है। कुछ समय पूर्व बजरंग दल के कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए औचक निरीक्षण के दौरान इस गो-सदन की खौफनाक तस्वीरें सामने आई थीं। प्रांगण में चारों तरफ गोवंश के कंकाल और हड्डियां बिखरी मिली थीं, और इलाज के अभाव में दम तोड़ रहे बीमार पशुओं को चील-कौवे नोच रहे थे।
उस समय इस वीभत्स दृश्य ने प्रदेश स्तर पर सुर्खियां बटोरी थीं। हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि मामले में लीपापोती करते हुए बड़े अधिकारियों को बचाने के लिए केवल छोटे कर्मचारियों पर गाज गिराकर इतिश्री कर दी गई थी। अव्यवस्थाओं के चलते यह केंद्र लगातार पशुओं की मौत का अखाड़ा बना हुआ था।
इस गो-सदन के बंद होने से मिठौरा क्षेत्र के दर्जनों गांवों के पशुपालकों और किसानों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। पहले स्थानीय स्तर पर ही बेसहारा पशुओं को यहाँ आश्रय मिल जाता था, जिससे खेतों में फसलों का नुकसान काफी हद तक रुक गया था। अब इस केंद्र के बंद होने से आवारा पशु दोबारा खेतों का रुख करेंगे। किसानों का कहना है कि अब उन्हें आवारा पशुओं को छोड़ने के लिए कई किलोमीटर दूर जाना पड़ेगा, जो व्यावहारिक रूप से बेहद कठिन है।

> “शासन के नियमानुसार 50 से कम क्षमता वाले अस्थायी गो-सदनों को बड़े केंद्रों में समाहित (शिफ्ट) करने का आदेश प्राप्त हुआ था। इसी आदेश के अनुपालन में मदनपुरा गो-सदन के गोवंश को सदर स्थित लक्ष्मीपुर कोर्ट गो-सदन में सुरक्षित रूप से शिफ्ट कर दिया गया है।”
> *सिद्धार्थ गुप्त, उप जिलाधिकारी (SDM), निचलौल।*

भले ही प्रशासनिक स्तर पर इसे ‘कम क्षमता’ का हवाला देकर शिफ्टिंग का नाम दिया जा रहा हो, लेकिन जमीन पर स्थिति गंभीर है। क्षेत्र के किसानों ने मांग की है कि यदि मदनपुरा केंद्र को बंद किया गया है, तो स्थानीय स्तर पर फसलों की सुरक्षा और आवारा पशुओं के प्रबंधन के लिए प्रशासन तुरंत कोई वैकल्पिक और ठोस व्यवस्था सुनिश्चित करे, अन्यथा किसान आंदोलन को बाध्य होंगे।

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