श्रावस्ती के इकौना स्थित गोमदापुर गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के चौथे दिन आचार्य विनय तिवारी महाराज (प्रतापगढ़) ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म प्रसंग का वर्णन किया। यह कथा स्वर्गीय केदारनाथ तिवारी की पुण्यतिथि और चारधाम यात्रा के पुण्य अवसर पर आयोजित की जा रही है। कथा व्यास ने बताया कि आकाशवाणी के माध्यम से कंस को यह संदेश मिला था कि उसकी बहन देवकी की आठवीं संतान ही उसका वध करेगी। इस भय से कंस ने देवकी और वासुदेव को कारागार में डाल दिया और उनकी संतानों का वध करता रहा। जब आठवीं संतान के रूप में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, तो वासुदेव उन्हें सुरक्षित गोकुल ले गए। इस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने धरती पर अवतार लेकर अधर्म का नाश किया। आचार्य तिवारी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण मनुष्य के जीवन को पवित्र बनाता है। यह भक्ति, सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। उन्होंने बताया कि वास्तविक शांति और ईश्वर की कृपा मोह, अहंकार और लोभ का त्याग करने से ही प्राप्त होती है। कथा के दौरान भजन-कीर्तन और आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भावविभोर होकर शामिल हुए। इस आयोजन को उमानाथ तिवारी, सुरेश तिवारी और उनके परिवार द्वारा कराया जा रहा है। इस अवसर पर कुलगुरु यज्ञयराम त्रिपाठी, उमानाथ तिवारी, रमेश तिवारी, रितेश, अमरेश, कमल पांडे, बलदाऊ पांडे सहित क्षेत्र के अनेक श्रद्धालु और महिलाएं उपस्थित रहीं।
गोमदापुर में श्रीमद्भागवत कथा जारी:आचार्य विनय तिवारी ने कहा- कंस का काल धरती पर जन्म ले चुका था
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