सिद्धार्थनगर जिले में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जी.एन. ने उन सभी स्कूल वाहनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है, जिनकी फिटनेस प्रमाणपत्र अवधि समाप्त हो चुकी है। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि ऐसे सभी वाहन तत्काल परिवहन विभाग में प्रस्तुत कर फिटनेस प्रमाणपत्र प्राप्त करें। ऐसा न करने पर वाहन का चालान, निरुद्धीकरण और संबंधित विद्यालय प्रबंधन के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। जिलाधिकारी कार्यालय से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, उत्तर प्रदेश शासन के परिवहन विभाग के निर्देशों पर जिले में 1 अप्रैल से 15 अप्रैल 2026 तक स्कूली वाहनों के विरुद्ध एक विशेष अभियान चलाया गया था। इस अभियान के दौरान कई ऐसे विद्यालय वाहन चिह्नित किए गए जिनकी फिटनेस अवधि समाप्त हो चुकी थी या उनके आवश्यक अभिलेख पूरे नहीं थे। इसके बाद परिवहन विभाग ने संबंधित विद्यालयों को कई बार नोटिस भेजे, दूरभाष पर संपर्क किया और अधिकारियों ने व्यक्तिगत रूप से विद्यालयों में जाकर भी जानकारी दी। हालांकि, इसके बावजूद कई स्कूल प्रबंधन अपने वाहनों की फिटनेस कराने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। प्रशासन ने बताया कि स्कूल वाहनों की निगरानी अब तकनीकी माध्यमों से भी की जा रही है। उत्तर प्रदेश इंटीग्रेटेड स्कूल व्हीकल मॉनिटरिंग पोर्टल पर जिले के सभी विद्यालय वाहनों का विवरण उपलब्ध है। इस पोर्टल की निगरानी जिला स्तर के साथ-साथ शिक्षा विभाग, परिवहन विभाग और मुख्यालय स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा भी की जा रही है। इन प्रयासों के बावजूद, कई विद्यालयों के वाहन अभी भी बिना वैध फिटनेस के पोर्टल पर दर्ज हैं, जो बच्चों की सुरक्षा के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि फिटनेस प्रमाणपत्र किसी भी वाहन की सड़क पर सुरक्षित संचालन की सबसे महत्वपूर्ण शर्त होती है। फिटनेस समाप्त होने के बाद वाहन के ब्रेक, टायर, स्टीयरिंग, लाइट, आपातकालीन निकास द्वार और अन्य सुरक्षा उपकरणों की नियमित जांच नहीं हो पाती, जिससे दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है। स्कूली वाहनों में प्रतिदिन सैकड़ों बच्चे यात्रा करते हैं, इसलिए ऐसे मामलों में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने जिले के सभी विद्यालय संचालकों और प्रबंधकों को निर्देशित किया है कि वे अपने वाहनों के सभी अभिलेखों की जांच कर लें और जिन वाहनों की फिटनेस समाप्त हो चुकी है, उनका तत्काल नवीनीकरण कराएं। उन्होंने कहा कि यदि कोई फिटनेस समाप्त वाहन बच्चों को लेकर सड़क पर संचालित मिलता है तो उसके विरुद्ध मोटर वाहन अधिनियम के तहत चालान की कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर वाहन को निरुद्ध भी किया जाएगा और संबंधित विद्यालय प्रबंधन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस संबंध में किसी भी प्रकार की लापरवाही या नियमों की अनदेखी करने वाले विद्यालयों को बख्शा नहीं जाएगा। आने वाले दिनों में परिवहन विभाग और प्रशासन की संयुक्त टीमों द्वारा स्कूल वाहनों की सघन जांच भी की जा सकती है। ऐसे में सभी विद्यालयों को समय रहते अपने वाहनों की फिटनेस और अन्य आवश्यक दस्तावेज दुरुस्त कराने के निर्देश दिए गए हैं।
सिद्धार्थनगर में फिटनेस खत्म, फिर भी चल रहे स्कूल वाहन:डीएम ने कहा- ऐसे वाहनों पर कार्रवाई करें
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