आस्था, अकीदत और गम के माहौल के बीच डुमरियागंज तहसील क्षेत्र का हल्लौर गुरुवार को धार्मिक भावनाओं से सराबोर नजर आया। हुसैनिया वजीह अहमद बैतूल इमाम में आयोजित दस दिवसीय मजलिस के समापन अवसर पर बड़ी संख्या में अकीदतमंद जुटे। कर्बला के संदेश, इंसाफ और कुर्बानी की चर्चा के बीच कई श्रद्धालु भावुक हो उठे और पूरा माहौल मातमी अकीदत में डूब गया। नौ मोहर्रम की मजलिस में बड़ी संख्या में पहुंचे अकीदतमंद डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के हल्लौर स्थित हुसैनिया वजीह अहमद बैतूल इमाम में नौ मोहर्रम के अवसर पर दोपहर 12 बजे मजलिस का आयोजन शुरू हुआ। यह कार्यक्रम दस दिनों से चल रही मजलिसों के समापन अवसर पर आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। ईरान से आए मौलाना ने बयान किया कर्बला का संदेश मजलिस को संबोधित करते हुए ईरान से आए मौलाना महफूज़ हुज्जत ने इमाम हुसैन के जीवन और कर्बला की घटनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन का संघर्ष केवल एक युद्ध नहीं बल्कि हक, इंसाफ और मूल्यों की रक्षा का प्रतीक था। ‘किरदार, अखलाक और इल्म से लड़ी गई थी जंग’ मौलाना ने अपने संबोधन में कहा कि कर्बला का संदेश मानवता, नैतिकता और सत्य के पक्ष में खड़े होने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन ने संघर्ष को किरदार, अखलाक और इल्म के साथ जिया और प्रस्तुत किया। हज़रत अब्बास और जनाबे सकीना के मसाएब का हुआ बयान मजलिस के दौरान मौलाना ने इमाम हुसैन के भाई हज़रत अब्बास के जीवन और उनके योगदान पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही गाज़ी अब्बास और जनाबे सकीना से जुड़ी घटनाओं का उल्लेख किया, जिसे सुनकर माहौल भावुक हो गया। भावुक हुए अकीदतमंद, गूंजीं अकीदत की सदाएं मजलिस के दौरान कई अकीदतमंद भावुक नजर आए। कार्यक्रम स्थल पर ‘या अब्बास’ और ‘या सकीना’ की सदाएं गूंजती रहीं और उपस्थित लोग धार्मिक भावनाओं से जुड़कर कार्यक्रम में शामिल रहे। आयोजकों ने जताया आभार कार्यक्रम के समापन पर मजलिस के आयोजक गुलरेज़ ने सभी अकीदतमंदों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के धार्मिक आयोजन सामाजिक और आध्यात्मिक जुड़ाव को मजबूत करते हैं।
‘या अब्बास, या सकीना’ की सदाओं से गूंजा हल्लौर:सिद्धार्थनगर में दस दिवसीय मजलिस का समापन, कर्बला के संदेश पर मंथन
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