श्रावस्ती के नासिरगंज कस्बे में 9वीं मोहर्रम की बृहस्पतिवार देर रात्रि को पारंपरिक ‘आग का मातम’ हुआ। कर्बला के शहीदों की याद में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने दहकते अंगारों पर चलकर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस धार्मिक आयोजन को देखने के लिए कस्बे और आसपास के इलाकों से भारी भीड़ उमड़ी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, दुलदुल अलम और पारंपरिक ताजिया का जुलूस रात्रि में मुख्य हुसैनिया इमामबाड़े से निकाला गया। यह जुलूस शिया-सुन्नी समुदाय के घरों से होते हुए तय मार्गों पर भ्रमण करता हुआ पुनः इमामबाड़े के प्रांगण में पहुंचा। देर रात इमामबाड़े के सहन में लकड़ियां जलाकर दहकते अंगारों का एक लंबा रास्ता तैयार किया गया। अकीदतमंदों ने पूरी आस्था और साहस के साथ नंगे पांव लाल अंगारों पर चलकर कर्बला के शहीदों को अपनी श्रद्धांजलि दी। इस दौरान पूरा माहौल ‘या हुसैन’ और ‘या अब्बास’ की सदाओं से गूंज उठा। मजलिस के दौरान वक्ताओं ने कर्बला की कुर्बानी को याद करते हुए बताया कि इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम हक और सच्चाई की राह पर थे। यजीद की ज़ुल्मी ताकतों ने उनके 72 साथियों को घेरकर तीन दिनों तक भूखा-प्यासा रखकर शहीद कर दिया था। यह कुर्बानी इंसानियत, हक और इंसाफ की एक अमर मिसाल है।
नासिरगंज में 9 वीं मोहर्रम पर आग का मातम:श्रावस्ती मे अकीदतमंदों ने कर्बला के शहीदों की याद में अंगारों पर चलें
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