HomeHealth & Fitnessआरक्षण के जनक थे छत्रपति शाहूजी महाराज

आरक्षण के जनक थे छत्रपति शाहूजी महाराज

जिस समय भारत में जातिवाद चरम सीमा पर था। छुआछूत, दलित और महिला उत्पीड़न परम्परा के रुप में स्वीकार कर ली गयी थी, आम जनता दोहरी शासन व्यवस्था झेल रही थी और देश के अशिक्षित, 90% लोग इसे भाग्य भगवान की नियति समझने लगे थे, उसी समय महामानवतावादी, आरक्षण के जनक और शिक्षा के अग्रदूत छत्रपति शाहू जी महाराज का भारत की राजनीति में प्रवेश होता है। उस दौर में सामाजिक परिवर्तन की बुनियाद का पत्थर बनते हुए सबसे गहरी नींव में मनुष्यता का पत्थर अगर किसी ने रखा तो वह थे छत्रपति शाहूजी महाराज जी। यह वह दौर था जब बाल गंगाधर तिलक को यह कहते हुए सुना गया कि यह तेली तंबोली कुम्हार लोहार विधानसभा में जाकर क्या करेंगे। जाति व्यवस्था को तोड़ने के लिए केवल विचारों में प्रगतिशील होना ही काफी नहीं है आपको अपने कार्य और व्यवहार मे भी इसे अमल में लाना होता है और जहां मौका मिले क्षमतानुसार काम करके दिखाना  आवश्यक होता है। 

आप की नीतियों में यह स्पष्ट दिखने चाहिए कि आप सामाजिक परिवर्तन के हितैषी है, वरना सामाजिक न्याय की बात तो वे लोग भी करते हैं जो इसके धुर विरोधी हैं और शाहू जी के विचारों को कतई नहीं मानते हैं तथा उनकी जन्म तिथि उनके मृत्यु के दिन उनको श्रद्धांजलि अर्पित करने का दोहरा चरित्र अपनाते हैं। प्रोफेसर लक्ष्मण यादव सामाजि न्याय पाठशाला में एक घटना बताते हैं राजा के दरबार में एक अछूत जाति के शख्स रहते थे उनका नाम था गंगाराम कांबले उनके साथ उन्हीं के दरबार के ब्राह्मण लोगों ने अपमान जनित व्यवहार कर दिया, गंगाराम कांबले की इतनी ही गलती थी गंगाराम कांबले दलित होने के बावजूद भी तालाब से पानी पी लिया था, उनके साथ मारपीट की जाती है यह बात उस राजा को पता चलता है तो उस राजा ने अपने दरबारी गंगाराम को बुलाते हैं और गंगा राम कांबले की आर्थिक मदद करके यह कहा कि तुम जाओ और मुख्य चौराहे पर चाय और पानी की  दुकान खोलो। गंगाराम कांबले चाय पानी की दुकान खोलते हैं और कोल्हापुर का वह राजा दलित गंगाराम की दुकान पर जाकर खुद चाय पीने का फैसला करता है। 

आज आपको यह बात साधारण लग रही होगी लेकिन याद कीजिए 20वीं शताब्दी की शुरुआती दशक में जब जातिवाद चरम पर था उस दौर में यह बात कितनी बड़ी रही होगी। उस राजा ने गंगाराम कांबले से पूछा तुमने अपनी दुकान के बोर्ड पर अपना नाम क्यों नहीं लिखा है इस पर गंगाराम कांबले ने कहा दुकान के बाहर दुकानदार का नाम और जाति लिखना कोई जरूरी तो नहीं तब उस राजा ने चुटकी लेते हुए कहां की ऐसा लगता है कि तुम पूरे शहर का धर्म भ्रष्ट करके मानोगे जी हां वह राजा था छत्रपति शाहूजी महाराज के दरबार में 1894 में कुल  60 पदों पर एक ही वर्ग के उच्च जाति के लोगों का कब्जा था। इसी प्रकार लिपिक के कुल 500 पदों में से केवल 10 पद गैर  उच्च जाति के थे। छत्रपति शाहूजी ने सोचा कि सबसे कम आबादी वाले सारे पदों पर कब्जा जमाए बैठे हैं इस विचार के तहत 26 जुलाई 1902 को कोल्हापुर रियासत में शिक्षा और नौकरियों में पिछड़ों और दलितों को 50% आरक्षण का प्रावधान लागू कर दिया गया। आरक्षण का पहली बार कोई व्यवहारिक नियम व्यावहारिक कानून बना करके लागू करने की शुरुआत करने वाले छत्रपति शाहूजी पहले राजा थे। 1912 आते-आते 95 पदों में से उच्च पदों पर कब्जा जमाए वालों की संख्या मात्र 35 रह गई थी न्याय केवल विचारों में नहीं बल्कि जमीन पर भी दिखना चाहिए 1912 का वह दौर था जब छत्रपति शाहूजी महाराज अपने राज्य में प्राथमिक शिक्षा को अनिवार्य कर दिया 25 जुलाई 1917 को अनिवार्य करने के साथ शिक्षा को निशुल्क कर दिया। छत्रपति शाहूजी महाराज ने 500 से 1000  आबादी वाले हर गांव हर कस्बे को एक स्कूल देने का फरमान जारी किया।

साहू जी महाराज ने 9 जुलाई 1917 को सभी मंदिरों और देवस्थानों को राज्य की संपत्ति घोषित कर दिया और यह भी कहा कि उनकी संपत्ति अब राज्य की संपत्ति होगी। पुजारीयों को भी वहां नियुक्त किया गया, मराठा जो गैर ब्राह्मण तबके में आते थे वह भी पुजारी बन सकेंगे। यह था क्रांतिकारी बदलाव छत्रपति शाहूजी महाराज में 1920 में साहू जी महाराज ने नागपुर में अखिल भारतीय बहिष्कृत बैठक में न सिर्फ हिस्सा लिया बल्कि उन्होंने एक दलित से चाय बनवा कर पी और ऐसा व्यवहार उन्होंने जीवन भर किया जात-पात को खत्म करना और पढ़ने की बात वह जीवन भर करते रहे। 1919 से पहले अछूत कहे जाने वाले समाज के किसी भी सदस्य का इलाज किसी भी अस्पताल में नहीं हो सकता था 1919 में साहू जी महाराज ने आदेश जारी किया जिसके अनुसार अछूत समाज का कोई भी सदस्य किसी भी अस्पताल में जाकर सम्मान व गरिमा के साथ इलाज करवा सकता था।

1919 में यह भी आदेश जारी करते हैं कि स्कूल और कॉलेज में जाति के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता आरक्षण वाले ऑपरेशन के दौरान पेट में कैंची छोड़ते हैं यह बात 10% आरक्षण वाले ज्यादा कहते हैं। यह बात कोई नई नहीं है, यह बात छत्रपति शाहूजी महाराज के समय से चली आ रही है। छत्रपति शाहूजी महाराज के दरबार में एक आरोप सामने आता है कि एक गैर ब्राह्मण को जो काम आपने दिया था वह ठीक से नहीं कर पा रहा है, उसका अधिकारी राजा से शिकायत करता है और कहता है कि देखिए, इस जाति को अपने नौकरी दे दी यह तो काम सही से नहीं कर पा रहा है। तब छत्रपति शाहूजी महाराज कहते हैं कि इसको ट्रेनिंग देने का काम किसका था, तुम्हारा इसको ट्रेंड करने का काम किसका था तुम्हारा, यानि तुम ट्रेनिंग देने में फेल हुए यानि तुम निकम्मे हो छत्रपति शाहूजी महाराज उस अधिकारी जो ब्राह्मण था उसे नौकरी से निकाल दिया, और उसकी जगह गैर ब्राह्मण अधिकारी को नियुक्त किया और छत्रपति शाहूजी महाराज ने उन सभी अधिकारियों जो ब्राह्मण थे ट्रेनिंग देने का काम करते थे। उन सभी को नौकरियां से निकाल दिया और उन सभी अधिकारियों के स्थान पर गैर ब्राह्मण अधिकारियों को रखा। 1920 में छत्रपति शाहूजी महाराज ने गरीब छात्रों के लिए हॉस्टल बनवाया जिसका नाम रखा प्रिंस शिवाजी मराठा फ्री बोर्डिंग हाउस।

1920 में मानगांव की सभा में छत्रपति शाहूजी महाराज घोषणा करते हैं कि बाबासाहेब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर अब आप दलितों और पिछड़ों के नेता होंगे। 3 मई 1920 में ही कोल्हापुर राज्य मे बंधुआ मजदूरी पर प्रतिबंध लगा देते हैं। यह जानकर आपको आश्चर्य लगेगा कि, 1980 में जाकर पूरे भारत में बंधुआ मजदूरी पर रोक लगता है। कितनी दूर दृष्टि थी उस बहुजन नायक में जिसके भीतर सामाजिक न्याय पल रहा था। 4 सितंबर 1921 को डॉ आंबेडकर कोल्हापुर के महाराजा को एक पत्र लिखकर कहते हैं मेरी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है दैनिक दिनचर्या के लिए मुझे कुछ मदद कर दीजिए मैं  नौकरी करके आपका पैसा लौटा दूंगा। 6 सितंबर 1921 को जवाबी खत्त के जरिए छत्रपति शाहूजी महाराज ने अंबेडकर से कहते हैं कि मैं आपको जरूरत का पूरा खर्च भेज रहा हूं और आप पत्नी से भी कहिए कि उन्हें भी कोई जरूरत हो तो देख फिक्र होकर मुझे बताएं।

लगातार छत्रपति साहू जी महाराज ने बाबा साहेब की मदद करते रहे ज्योतिबा फुले और अंबेडकर के बीच छत्रपति साहू जी महाराज एक कड़ी होते हैं। 26 जून 1874 को छत्रपति शाहूजी महाराज का जन्म होता है वह ओबीसी कुर्मी जाति से आते थे। प्रोफेसर लक्ष्मण यादव खासतौर से ओबीसी समाज के लोगों से एक प्रश्न करते हैं आपका सबसे ज्यादा नुकसान क्या किया गया है। आपको पता है आपके समाज से आपको काट दिया गया है। आपको आपके इतिहास से काट दिया गया है। आपको पता लगने नहीं दिया गया आपके समाज में कौन-कौन से महान पुरुष हुए हैं। ईमानदारी के साथ बताइए, क्या आपको छत्रपति शाहूजी महाराज के बारे में इतनी बातें पता थी। बहुजन समाज के लोग आपका दुश्मन कौन है। क्या पहचान पाए ओबीसी के लोग, इतिहास सुनकर धार्मिक स्थल पर पत्थर चलाते हो। आपका कुछ खतरे में नहीं है, अगर कुछ खतरे में है तो नौकरी है, शिक्षा है, आरक्षण है। ओबीसी के लोग, अयोध्या झांकी है, मथुरा काशी बाकी है, क्या नारा लगाओगे। 

हरी लाल यादव 
सिटी स्टेशन जौनपुर 
मोबाइल नंबर 9452 21 5225

 

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