नई दिल्ली: करूर भगदड़ मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को DMK को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के सार्वजनिक भाषणों और दौरों पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर नाराजगी जताते हुए कहा कि अदालत राजनीतिक गतिविधियों को नियंत्रित नहीं कर सकती।
जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने सुनवाई के दौरान पूछा, “क्या आप चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट तय करे कि मुख्यमंत्री कहां जाएं और क्या बोलें? मुख्यमंत्री इस मामले में आरोपी नहीं हैं।”
क्या थी DMK की मांग?
DMK ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री जोसेफ विजय का 10 जुलाई को करूर दौरा और पीड़ित परिवारों से मुलाकात मामले के गवाहों को प्रभावित कर सकती है। पार्टी ने मुख्यमंत्री के भाषणों और सार्वजनिक कार्यक्रमों पर रोक लगाने की मांग की थी।
हालांकि, अदालत की सख्त टिप्पणी के बाद DMK ने अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
करूर भगदड़ मामला क्या है?
सितंबर 2025 में तमिलनाडु के करूर जिले में जोसेफ विजय की चुनावी सभा के दौरान मची भगदड़ में 41 लोगों की मौत हो गई थी। घटना के बाद मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर CBI को सौंप दी गई थी।
DMK का आरोप है कि यह हादसा कार्यक्रम के खराब प्रबंधन और TVK कार्यकर्ताओं की लापरवाही के कारण हुआ। वहीं, TVK और मुख्यमंत्री विजय ने इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया है और जांच में सहयोग करने की बात कही है।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि जब मामले की जांच CBI कर रही है, तब किसी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी के भाषण या दौरे पर रोक लगाने का आदेश देना न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।












