बहराइच के जरवल कस्बे में मौलाना यासूब अब्बास के आगमन पर अकीदतमंदों ने उनका स्वागत किया। जरवल चौराहे से दरगाह हज़रत अब्बास और कर्बला तक श्रद्धालुओं की मौजूदगी रही। सभासद शावेज़ काज़मी मोनिस के आवास पर भी लोगों ने उनसे मुलाकात की। कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल तैनात रहा। दरगाह हज़रत अब्बास में आयोजित ‘याद-ए-शहीदाने कर्बला’ की 20वीं मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि कर्बला का संदेश इंसानियत, न्याय, सत्य और अत्याचार के विरोध का प्रतीक है। उन्होंने लोगों से इमाम हुसैन (अ.स.) के आदर्शों को जीवन में अपनाने तथा समाज में शांति, भाईचारा और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने की अपील की। मजलिस में मौलाना अहमद रज़ा बिजनौरी ने हज़रत अली असगर (अ.स.) की शहादत का जिक्र करते हुए उनके जीवन प्रसंगों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के अंत में विभिन्न अंजुमनों ने नौहाख़्वानी और सीनाज़नी के माध्यम से शहीदाने कर्बला को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर अंजुमन अज़ाए हुसैन मीरगंज, ज़ुल्फ़ेकार-ए-हैदरी अछेछरा, हिज़्बुल्लाह-ए-हुसैनी बरूहा, सक्काए हरम कटरा और अंजुमन हुसैनिया असगरिया जरवल सहित कई अंजुमनों ने भाग लिया। श्रद्धालुओं ने ताबूत, दुल्दुल, गहवारा-ए-हज़रत अली असगर (अ.स.) और हज़रत अब्बास (अ.स.) के अलम की ज़ियारत की। कार्यक्रम के समापन पर लंगर का आयोजन भी किया गया।
जरवल में ‘याद-ए-शहीदाने कर्बला’ मजलिस:मौलाना ने दिया इंसानियत और भाईचारे का संदेश
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