नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र से एक दिन पहले रविवार को केंद्र सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाकर सभी राजनीतिक दलों से सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने में सहयोग की अपील की। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में सरकार ने विपक्ष से महत्वपूर्ण विधेयकों पर सार्थक चर्चा और सकारात्मक सहयोग का आग्रह किया।
बैठक के दौरान विपक्षी दलों ने अलग गुट बनाने वाले सदस्यों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराई। विरोध स्वरूप विपक्ष के कुछ नेताओं ने कुछ समय के लिए सांकेतिक बहिर्गमन भी किया। हालांकि बाद में वे बैठक में वापस लौट आए और चर्चा में शामिल हुए।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू की ओर से बुलाई गई इस बैठक में केंद्रीय मंत्री एवं राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा, संसदीय कार्य राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल और डॉ. एल. मुरुगन सहित अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। बैठक में 40 राजनीतिक दलों के कुल 58 नेताओं ने हिस्सा लिया।
संसदीय कार्य मंत्रालय के अनुसार, बैठक की शुरुआत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की प्रारंभिक टिप्पणी से हुई। इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बैठक का संचालन किया। बैठक के समापन पर रक्षा मंत्री ने सभी नेताओं को उनकी उपस्थिति, सुझाव और सक्रिय भागीदारी के लिए धन्यवाद दिया।
रिजिजू ने सभी राजनीतिक दलों से संसद के दोनों सदनों का सुचारु संचालन सुनिश्चित करने में सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार संसद के नियमों के तहत अनुमत सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर सदन में चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि वह आगामी सत्र के दौरान विधायी कार्यों में रचनात्मक भूमिका निभाए।
संसदीय कार्य मंत्रालय के अनुसार, बैठक में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने मानसून सत्र के दौरान उठाए जाने वाले मुद्दों पर अपने विचार रखे। कई दलों ने सरकार के समक्ष अपनी प्राथमिकताएं और चिंताएं साझा कीं। सरकार ने सभी सुझावों को गंभीरता से सुनने की बात कही।
बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सभी दलों से संसद को सुचारु रूप से चलाने और विधेयकों पर सार्थक चर्चा में भाग लेने का अनुरोध किया गया है। उन्होंने बताया कि मानसून सत्र के दौरान सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक सदन में पेश करने जा रही है और विपक्ष से आग्रह किया गया है कि वह इन पर सकारात्मक चर्चा कर उन्हें पारित कराने में सहयोग करे।
रिजिजू ने कहा कि लोकतंत्र में सभी दलों को अपनी बात रखने का अधिकार है। केवल हंगामा करने और चर्चा से दूर रहने से किसी भी दल को राजनीतिक लाभ नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि सदन व्यवस्थित तरीके से चलेगा तो छोटे दलों सहित सभी राजनीतिक दलों को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर मिलेगा।
उन्होंने कहा कि सर्वदलीय बैठक में अलग-अलग विचार सामने आना लोकतांत्रिक व्यवस्था की स्वाभाविक प्रक्रिया है। सरकार ने सभी दलों के सुझावों को सुना है और उनका उचित संज्ञान लिया जाएगा।
गौरतलब है कि संसद का मानसून सत्र सोमवार, 20 जुलाई से शुरू होगा और सरकारी कामकाज की आवश्यकता के अनुसार यह गुरुवार, 13 अगस्त तक चल सकता है। इस दौरान 25 दिनों की अवधि में कुल 19 बैठकें प्रस्तावित हैं। सत्र में सरकार विधायी कार्यों के साथ-साथ विभिन्न राष्ट्रीय और जनहित के मुद्दों पर चर्चा कराने की तैयारी में है।
सर्वदलीय बैठक : सरकार ने विपक्ष से की विधेयकों पर सार्थक चर्चा और सुचारू संचालन में सहयोग की अपील
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