काठमांडू। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष और युद्ध के कारण दुनिया के कई देशों में तेल की आपूर्ति बाधित हुई है। नेपाल भी तेल के वैश्विक संकट से अछूता नहीं रहा। पेट्रोलियम और डीजल की कमी को देखकर नेपाल सरकार ने अहम निर्णय लिया है। राजधानी काठमांडू में हुई शाह कैबिनेट की बैठक में हर हफ्ते दो दिन की छुट्टी देने का प्रस्ताव पास किया गया, ताकि ऊर्जा की खपत कम की जा सके और पेट्रोलियम की बचत सुनिश्चित हो सके।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह नई नीति विशेष रूप से निजी और सरकारी कार्यालयों में लागू होगी। कैबिनेट ने बताया कि कदम देश में ईंधन की कमी को देखकर अस्थायी उपाय के रूप में लिया है। अधिकारियों ने कहा कि छुट्टी का दिन सप्ताह के मध्य और अंत में निर्धारित किया जा सकता है, ताकि कार्यालयों और उद्योगों में काम प्रभावित न हो।
नेपाल में पेट्रोलियम संकट पिछले कुछ महीनों से बढ़ता जा रहा है। मिडिल ईस्ट में जारी जंग के कारण तेल के निर्यात में बाधाएं आई हैं, जिससे देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में औसतन तेल की खपत में 15-20 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। इसकारण सरकार ने ऊर्जा बचत के लिए यह कदम उठाया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस निर्णय से ईंधन की बचत होगी, लेकिन आर्थिक गतिविधियों पर इसका असर भी पड़ेगा। कई उद्योगों ने चिंता जाहिर की है कि सप्ताह में दो दिन की छुट्टी से उत्पादन और व्यवसाय प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि सरकार का कहना है कि यह अस्थायी कदम है और स्थिति के अनुरूप बदलाव किए जाएंगे। नेपाल की जनता और व्यापारिक वर्ग नए निर्णय पर मिली-जुली प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कुछ लोग ऊर्जा संकट से निपटने का सकारात्मक उपाय मान रहे हैं, जबकि अन्य दैनिक जीवन और उद्योगों के लिए चुनौतीपूर्ण कदम मान रहे हैं।
नेपाल में गहराया तेल संकट……………..सप्ताह में दो दिन छुट्टी रखने का प्रस्ताव
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