
लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय, केजीएमयू की ओपीडी में रही व्यवस्थाएं सुधर नहीं पा रही है। तो वहीं दिव्यांगों,वृद्ध,सैनिकों और पत्रकारों के काउंटर पर भी आम लोगों की भीड़ बढ़ती जा रही है। पर्चा बनवाने से लेकर डॉक्टरों को दिखाने के लिए जूझना पड़ रहा है।
लखनऊ स्थित केजीएमयू में रोजाना 6,000 से 7,000 मरीज ओपीडी में आते हैं। यहाँ लगभग 40 से ज्यादा विभाग हैं,जिनमें सामान्य ओपीडी में प्रतिदिन 300 और सुपर-स्पेशियलिटी ओपीडी में 200 मरीजों को देखने का कोटा निर्धारित है। तो वहीं इलाज के अभाव में आऐ मरीज घोर अनियमितताओं का है शिकार हो रहे।
जिसमें दिव्यांगों,वृद्ध,सैनिकों और पत्रकारों के लिए आरक्षित काउंटर होने के बावजूद आम मरीजों की भीड़ जुटी दिख रही है। जिसके कारण वृद्धजन,सैनिक,दिव्यांग और पत्रकारों को दर—दर की ठोकरें खानी पड़ती हैं। इसके कारण दिव्यांग और वृद्धजन परेशान होकर और अधिक बीमार हो जाते हैं, वहीं सैनिकों और पत्रकारों का समय व्यर्थ होता है साथ ही इन आरक्षित काउंटर पर सुरक्षा में लगे कर्मी और कुछ अन्य व्यक्ति भी अपने परिचय से कुछ जुगाड़ करने वाले मरीजों के परिजनों से मिल कर इन काउंटर पर अंदर या बाहर से आकर इन लोगों को सुविधा पहुंचाते हैं। दूसरी ओर दिव्यांग मरीजों की बुनियादी सुविधाओं और पहुंच में गंभीर खामियां अभी भी बरकरार हैं। अस्पताल प्रशासन द्वारा समय-समय पर दिव्यांगों के लिए विशेष क्लिनिक खोलने के दावे किए जाते हैं,लेकिन जमीनी हकीकत में कई बड़ी समस्याएं अब भी जस की तस हैं। दिव्यांग-अनुकूल शौचालय: अधिकांश ओपीडी और इनडोर वार्डों में शारीरिक रूप से अक्षम मरीजों के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए सुलभ शौचालयों की भारी कमी है। अतिभार और लंबी प्रतीक्षा: अत्यधिक मरीजों के दबाव और अव्यवस्थित निर्माण के कारण दिव्यांग मरीजों को पंजीकरण से लेकर जांच तक में घंटों लंबी कतारों में जूझना पड़ता है ।












