HomeHealth & Fitnessछत्तीसगढ़: स्वास्थ्य मंत्री का बड़ा ऐलान, एनालॉग पनीर पर लगा पूर्ण प्रतिबंध

छत्तीसगढ़: स्वास्थ्य मंत्री का बड़ा ऐलान, एनालॉग पनीर पर लगा पूर्ण प्रतिबंध

रायपुर। छत्तीसगढ़ में आज से एनालॉग पनीर पनीर को प्रतिबंधित कर दिया गया है। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में एनालॉग (नकली) पनीर की बिक्री और इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।

प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने नया रायपुर में गुरुवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह बड़ा ऐलान किया।

उन्होंने साफ किया कि लोगों की सेहत के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।उन्होंने बताया कि आज ही इस संबंध में आदेश जारी होने जा रहा है।

उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जितनी कार्रवाई नकली पनीर और खोवा पकड़ने की पिछले ढाई साल में हुई है, उतनी पिछले 5 सालों में भी नहीं हुई होगी।

सरकार मिलावटखोरी पर पूरी तरह गंभीर है।आदेश जारी होने के बाद राज्य की किसी भी दुकान, होटल, रेस्टोरेंट या ढाबे में एनालॉग पनीर का इस्तेमाल या बिक्री नहीं की जा सकेगी।

खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग को इसके प्रभावी नियंत्रण के निर्देश दिए गए हैं। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ मापदंडों के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

छत्तीसगढ़ में स्थित फैक्ट्रियां इसका उत्पादन कर सकती हैं, लेकिन वे इसे केवल दूसरे राज्यों में ही बेच सकेंगी। राज्य के भीतर इसकी सप्लाई प्रतिबंधित रहेगी।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की बात कही और घोषणा की कि ‘स्वस्थ बस्तर अभियान’ का दूसरा चरण जल्द ही शुरू किया जाएगा ताकि दूरस्थ क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाई जा सकें।

उन्होंने युवाओं और रोजगार के मुद्दे पर बात करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन में विभाग के भीतर लगातार बंपर भर्तियां की जा रही हैं और स्वास्थ्य कर्मियों व डॉक्टरों के खाली पदों को जल्द से जल्द भरा जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि पिछले एक साल में रायपुर में मिलावटी और एनालॉग पनीर के खिलाफ कई बड़ी कार्रवाई हुई हैं। जुलाई 2025 में बिरगांव की काशी एग्रो फूड्स फैक्ट्री से करीब 2,500 किलो संदिग्ध/एनालॉग पनीर जब्त कर फैक्ट्री सील की गई थी।

हाल ही में खाद्य विभाग ने रायपुर की एक और पनीर फैक्ट्री पर छापा मारकर करीब 1,700 किलो पनीर के सैंपल जांच के लिए भेजे हैं। यानी पिछले एक साल में रायपुर में करीब 4,200 किलो संदिग्ध पनीर पर कार्रवाई हो चुकी है।

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि बाजार में बड़ी मात्रा में बिक रहे एनालॉग पनीर को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। जांच में कई स्थानों पर ऐसा पनीर पाया गया, जो पारंपरिक दूध से तैयार नहीं किया गया था, बल्कि वनस्पति तेल, स्टार्च और अन्य सामग्री से बनाया गया था।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि एनालॉग पनीर पर रोक लगाने संबंधी आदेश जल्द जारी कर दिया जाएगा। आदेश लागू होने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग बाजार, होटल, रेस्टोरेंट, डेयरी और मिठाई दुकानों में विशेष जांच अभियान चलाएगा।

नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। सरकार के निर्देश के बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीमें राज्यभर में सैंपलिंग अभियान चलाएंगी।

संदिग्ध पनीर के नमूने जांच के लिए प्रयोगशालाओं में भेजे जाएंगे। यदि किसी प्रतिष्ठान में प्रतिबंधित या गलत लेबलिंग वाला पनीर पाया गया तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

एनालॉग पनीर असली दूध या छेने से नहीं, बल्कि सस्ते वनस्पति घी, पाम ऑयल, स्टार्च और रसायनों के मिश्रण से तैयार किया जाता है। बीते कुछ वर्षों में कम लागत और अधिक लाभ के चक्कर में बाजारों में इसकी उपलब्धता काफी बढ़ गई थी।

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, पाम ऑयल और हाइड्रोजनेटेड फैट से बने इस उत्पाद का लगातार सेवन दिल की बीमारियों, उच्च कोलेस्ट्रॉल, फैटी लिवर और पाचन संबंधी गंभीर समस्याओं का कारण बनता है।

 

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