नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर के रणनीतिकार रहे वाइस एडमिरल अजय कोचर ने शुक्रवार को नई दिल्ली में नौसेना स्टाफ के नए वाइस चीफ का पदभार संभाल लिया। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के तहत नौसेना की महत्वपूर्ण संपत्तियों की आक्रामक फॉरवर्ड तैनाती को लागू करने में अहम भूमिका निभाई थी। वाइस एडमिरल कोचर ने वाइस एडमिरल संजय वात्स्यायन की जगह ली है, जिन्हें पश्चिमी नौसेना कमान का अगला प्रमुख नियुक्त किया गया है। वाइस एडमिरल ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद साउथ ब्लॉक में उन्हें ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया।
वाइस एडमिरल कोचर ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान नौसेना की उच्च-स्तरीय युद्ध-तैयारी का नेतृत्व किया था। वह भारतीय नौसेना के 48वें वाइस चीफ के रूप में कार्यभार संभाला। वे अपने साथ नौसेना मुख्यालय में अग्रिम मोर्चे का व्यापक अनुभव लेकर आए हैं। नौसेना के दूसरे सबसे बड़े अधिकारी के तौर पर कमान संभालने से पहले उन्होंने अंडमान और निकोबार कमांड के कमांडर-इन-चीफ के तौर पर काम किया था। इससे पहले पश्चिमी नौसेना कमांड के चीफ आॅफ स्टाफ के तौर पर उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान नौसेना के अहम संसाधनों की आक्रामक अग्रिम तैनाती में अहम भूमिका निभाई थी। पुणे स्थित प्रतिष्ठित नेशनल डिफेंस एकेडमी के छात्र रहे वाइस एडमिरल कोचर 01 जुलाई 1988 को भारतीय नौसेना में कमीशन हुए थे।
गनरी और मिसाइल प्रणालियों के विशेषज्ञ के तौर पर उन्होंने अपने 37 वर्षों से अधिक के शानदार करियर में कमांड, ऑपरेशनल और स्टाफ से जुड़े कई तरह के दायित्व संभाले हैं। उन्होंने युद्धपोतों ‘नाशक’, ‘विभूति’ और ‘कृपाण’ की कमान संभाली है और फ्रिगेट ‘त्रिकंड’ के कमीशनिंग कमांडिंग ऑफिसर भी रहे हैं। उन्होंने विमानवाहक पोत आईएनएस ‘विक्रमादित्य’ की भी कमान संभाली है। उनके कार्यकाल के दौरान विमानवाहक पोत ने अपने एयर विंग के एकीकरण और उसे ऑपरेशनल बनाने का काम सफलतापूर्वक पूरा किया।
ऑपरेशन सिंदूर में अहम भूमिका निभाने वाले अजय कोचर बने 48वें उप प्रमुख
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