उन्नाव। वित्तीय वर्ष 2025-26 में अनुदान संख्या-15 के अंतर्गत संचालित बकरी पालन एवं भेड़ पालन योजना की चयनित लाभार्थियों की सूची सामने आने के बाद पशुपालन विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। मामले में जब पड़ताल की गई कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
विभाग द्वारा जारी सूची में दर्ज कई मोबाइल नंबर बंद मिले, जबकि कुछ लाभार्थियों से संपर्क होने पर उन्होंने योजना को लेकर अलग-अलग जानकारी दी। कुछ लाभार्थियों ने बताया कि उन्हें अभी तक योजना का लाभ नहीं मिला है। सवाल यह भी खड़ा हो रहा अगर लाभ नहीं मिला तो सूची में उनका नाम कैसे शामिल है। जबकि कुछ ने कहा कि पशु तो उपलब्ध करा दिए गए, लेकिन अब तक बीमा नहीं कराया गया है।
लाभार्थियों का आरोप है कि बीमा कराने के नाम पर विभागीय स्तर से तीन हजार रुपये की मांग की जा रही है। एक लाभार्थी ने कहा कि “अगर हमारी आर्थिक स्थिति ठीक होती तो हम सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन ही क्यों करते।”
जांच के दौरान सूची में दर्ज कई नंबर लगातार बंद पाए गए, जिससे चयन प्रक्रिया और लाभार्थियों की वास्तविकता पर भी सवाल उठने लगे हैं। वहीं कुछ लाभार्थियों ने यह भी कहा कि उन्हें योजना की शर्तों और प्रक्रियाओं की पूरी जानकारी नहीं दी गई।
सूत्रों के अनुसार बकरी पालन योजना में दस लाभार्थियों को चयनित किया गया है, जबकि भेड़ पालन योजना में पांच लाभार्थियों को लाभ दिए जाने का दावा किया गया है। हालांकि जमीनी हकीकत विभागीय दावों से अलग नजर आ रही है।
बताया जा रहा है कि योजना के नोडल अधिकारी डिप्टी सीवीओ डॉ. हरिओम पटेल हैं। ऐसे में विभागीय निगरानी और लाभार्थियों तक योजनाओं के पारदर्शी क्रियान्वयन को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
गौरतलब है कि यह पूरा मामला जनपद उन्नाव के प्रभारी मंत्री धर्मपाल सिंह के विभाग से जुड़ा हुआ है, जिसके चलते मामला और अधिक चर्चा में आ गया है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई करता है या मामला केवल कागजों तक सीमित रह जाएगा।
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सूची में नाम, फिर लाभार्थियों को नहीं मिला लाभ?
पशुपालन विभाग द्वारा जारी बकरी व भेड़ पालन योजना की सूची अब कई सवाल खड़े कर रही है। सूची में लाभार्थियों के नाम दर्ज हैं, लेकिन कई लोगों का कहना है कि उन्हें योजना का पूरा लाभ नहीं मिला। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि अगर लाभार्थी चयनित हो चुके हैं तो फिर अनुदान की धनराशि आखिर कहां गई। लाभार्थी जॉच की मांग के रहे हैं
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पूर्व में भी हो चुकी है शिकायत
डिप्टी सीवीओ डॉ. हरिओम पटेल के खिलाफ शिकायतों का मामला पहले भी सामने आ चुका है। पशुपालन विभाग लखनऊ मंडल के अपर निदेशक ग्रेड-2 कार्यालय से जारी पत्र में डॉ. हरिओम पटेल के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों की जांच के आदेश दिए गए थे। पत्र में शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच कर आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे। मामले की जांच को लेकर विभागीय स्तर पर पत्राचार भी हुआ था, जिससे यह मामला पहले से ही विभाग की निगरानी में होने की चर्चा तेज हो गई है।
सीडीओ से नहीं हुई बात।
वही पूरे मामले को लेकर जब सीडीओ कृतिराज से बात करने का प्रयास किया गया तो उनसे बात नहीं हो सकी।












