शोहरतगढ़ (सिद्धार्थनगर) में 9 मोहर्रम की शाम नगर के चौक-चौराहों पर ताज़िए स्थापित किए गए। शाम 7 बजे से ताज़ियादारों ने दुकानों से ताज़िए निकालकर उन्हें अपने-अपने निर्धारित स्थानों पर रखा। इस दौरान पूरा नगर इमाम हुसैन और करबला के शहीदों की याद में श्रद्धा और अकीदत से भर गया। परंपरा के अनुसार, साल भर दुकानों में सुरक्षित रखे गए इन ताज़ियों को बाहर निकाला गया। अकीदतमंदों ने श्रद्धापूर्वक उनकी सजावट की और नगर के प्रमुख चौकों पर विधिवत रूप से स्थापित किया। चिंकू राईनी, अकबर अली कुरेशी, हबीबुल्लाह कुरैशी, निराला, रामसेवक, राकेश, राम अजोर वर्मा और अली अहमद सहित कई ताज़ियादार इस प्रक्रिया में शामिल रहे। प्रत्येक चौक पर श्रद्धालुओं ने अदब के साथ ताज़ियों पर फूल, अगरबत्ती और धूप अर्पित की। स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, यह सदियों पुरानी परंपरा है जिसमें सभी वर्गों के लोग उत्साहपूर्वक भाग लेते हैं। ताज़ियों की स्थापना के समय पूरे इलाके में “या हुसैन” की सदाएं गूंज उठीं। नगर के विभिन्न हिस्सों जैसे रमजान गली, कुजडा मोहल्ला, मस्जिद गली, अंसारी गली, गडाकुल, निबी दोहनी, छतहरी और धुनीया मोहल्ला में रोशनी और सजावट का मनमोहक दृश्य देखने को मिला। ताज़ियों की बारीक कारीगरी और सजावट को देखने के लिए बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक की भीड़ उमड़ पड़ी। इस आयोजन की एक खास बात यह रही कि इसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। ताज़ियादारों की सूची में रामसेवक, राकेश और राम अजोर वर्मा जैसे नाम शामिल होना यहां की गंगा-जमुनी संस्कृति का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है। रामसेवक ने बताया, “यह हमारे पुरखों की देन है। हर साल ताज़िया निकालकर हम सबको यह पैगाम देते हैं कि हक और सच्चाई की लड़ाई में इमाम हुसैन की कुर्बानी कभी भुलाई नहीं जा सकती।” प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। नगर पंचायत क्षेत्र में पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहा, जिससे शांति और सौहार्द का माहौल बना रहा। रात भर ताज़ियों की जियारत का सिलसिला जारी रहा। आसपास की दुकानों से लोगों ने श्रद्धालुओं के लिए शरबत और पानी की सबीलें भी लगाईं। स्थानीय प्रशासन ने सभी से अमन-चैन बनाए रखने की अपील की, जिसका नागरिकों ने पूरा सम्मान किया
शोहरतगढ़ में 9 मोहर्रम पर ताज़िए स्थापित:इमाम हुसैन की याद में नगर में श्रद्धा का माहौल
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